बस्ती/वाशीषष्ठी
रामकथा की परंपरा का पुनर्जागरण — बस्ती में ‘वशिष्ठ रामायण कथा’ का भव्य आयोजन
पूर्वांचल की सांस्कृतिक भूमि बस्ती एक बार फिर रामकथा की दिव्य चेतना से आलोकित होने जा रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी के दिव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में, तथा विश्व में प्रथम बार ‘वशिष्ठ रामायण कथा’ का आयोजन किया जा रहा है।यह ऐतिहासिक एवंसांस्कृतिक आयोजन दिनांक 18 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक स्थान — पौराणिक महर्षि वशिष्ठ आश्रम परिसर, बदनी मिश्र, जनपद बस्ती (उ.प्र.)में संपन्न होगा।इस विशिष्ट रामकथा के कथा-व्यास होंग
श्री तुलसी पीठाधीश्वर, पद्मविभूषण, जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज (श्री चित्रकूट धाम)।
उनकी वाणी में रामकथा केवल आख्यान नहीं, बल्कि संस्कृति, दर्शन और राष्ट्रबोध का जीवंत संगम बन जाती है।
आयोजन का महत्व यह आयोजन कई दृष्टियों से ऐतिहासिक है—वशिष्ठ परंपरा के माध्यम से रामकथा का दुर्लभ स्वरूप गुरु–शिष्य परंपरा और भारतीय शिक्षा-संस्कृति का स्मरण,पर्वांचल को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने का प्रयास,आयोजक की भूमिका
इस सांस्कृतिक महायज्ञ के आयोजक श्री राणा दिनेश प्रताप सिंह द्वारा क्षेत्रीय समाज, श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक संगठनों को जोड़कर एक अनुकरणीय पहल की गई है। यह आयोजन बताता है कि स्थानीय संकल्प भी राष्ट्रीय चेतना का माध्यम बन सकता है।
जब रामकथा केवल मंचीय कार्यक्रम न रहकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बन जाए, तब समाज को दिशा मिलती है। बस्ती में होने जा रहा यह आयोजन निश्चय ही—आध्यात्मिक ऊर्जा सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सनातन परंपरा की निरंतरता को नई ऊँचाई देगा। निस्संदेह—यह एक अच्छी ही नहीं, बल्कि अत्यंत शुभ और ऐतिहासिक खबर है।
रामकथा की परंपरा का पुनर्जागरण — बस्ती में ‘वशिष्ठ रामायण कथा’ का भव्य आयोजन
पूर्वांचल की सांस्कृतिक भूमि बस्ती एक बार फिर रामकथा की दिव्य चेतना से आलोकित होने जा रही है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ जी के दिव्य मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में, तथा विश्व में प्रथम बार ‘वशिष्ठ रामायण कथा’ का आयोजन किया जा रहा है।यह ऐतिहासिक एवंसांस्कृतिक आयोजन दिनांक 18 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक स्थान — पौराणिक महर्षि वशिष्ठ आश्रम परिसर, बदनी मिश्र, जनपद बस्ती (उ.प्र.)में संपन्न होगा।इस विशिष्ट रामकथा के कथा-व्यास होंग
श्री तुलसी पीठाधीश्वर, पद्मविभूषण, जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज (श्री चित्रकूट धाम)।
उनकी वाणी में रामकथा केवल आख्यान नहीं, बल्कि संस्कृति, दर्शन और राष्ट्रबोध का जीवंत संगम बन जाती है।
आयोजन का महत्व यह आयोजन कई दृष्टियों से ऐतिहासिक है—वशिष्ठ परंपरा के माध्यम से रामकथा का दुर्लभ स्वरूप गुरु–शिष्य परंपरा और भारतीय शिक्षा-संस्कृति का स्मरण,पर्वांचल को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर प्रतिष्ठित करने का प्रयास,आयोजक की भूमिका
इस सांस्कृतिक महायज्ञ के आयोजक श्री राणा दिनेश प्रताप सिंह द्वारा क्षेत्रीय समाज, श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक संगठनों को जोड़कर एक अनुकरणीय पहल की गई है। यह आयोजन बताता है कि स्थानीय संकल्प भी राष्ट्रीय चेतना का माध्यम बन सकता है।
जब रामकथा केवल मंचीय कार्यक्रम न रहकर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बन जाए, तब समाज को दिशा मिलती है। बस्ती में होने जा रहा यह आयोजन निश्चय ही—आध्यात्मिक ऊर्जा सांस्कृतिक आत्मविश्वास और सनातन परंपरा की निरंतरता को नई ऊँचाई देगा। निस्संदेह—यह एक अच्छी ही नहीं, बल्कि अत्यंत शुभ और ऐतिहासिक खबर है।
आयोजक, राणादिनेश प्रताप सिंह

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