सुबखरी में मनरेगा का महाघोटाला!
168 फर्जी मजदूरों की हाजिरी से सरकारी धन पर डाका?
संतकबीर नगर/नाथनगर।
उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को नाथनगर विकास खंड की ग्राम पंचायत सुबखरी में खुली चुनौती दी जा रही है। यहां मनरेगा योजना के अंतर्गत 168 मजदूरों की कथित फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सुबखरी में दुर्गेश के खेत से चैटोला पुलिया तक संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य तथा पंचायत भवन से लाला के घर होते हुए उमाशंकर के घर तक सड़क पर मिट्टी कार्य दिखाकर मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई। जबकि शिकायत मिलने पर जब मामले की जानकारी खंड विकास अधिकारी नाथनगर को दी गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में कहीं भी कोई मनरेगा कार्य संचालित नहीं हो रहा है और संबंधित मस्टररोल शून्य होना चाहिए।इस खुलासे के बाद पूरे विकास खंड में हड़कंप मच गया है। सवाल यह है कि जब कार्य हुआ ही नहीं तो 168 मजदूरों की हाजिरी किस आधार पर दर्ज की गई? क्या सरकारी धन की बंदरबांट की तैयारी थी? या फिर यह लंबे समय से चल रहे किसी बड़े खेल का हिस्सा है?
खंड विकास अधिकारी नाथनगर ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित ग्राम रोजगार सेवक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।ग्रामीणों का आरोप है कि सुबखरी के वास्तविक गरीब मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं, जबकि कागजों पर मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान निकालने की तैयारी की जा रही है। इससे मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सुबखरी पंचायत में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर विकास कार्यों के नाम पर धन की लूट हो रही है? क्या यह केवल रोजगार सेवक तक सीमित मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। सुबखरी पंचायत के इस कथित महाघोटाले में दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी अन्य मामलों की तरह धूल फांकती रह जाएगी?फिलहाल इतना तय है कि सुबखरी पंचायत में मनरेगा के नाम पर उठे इस विवाद ने विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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