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सोमवार, 3 नवंबर 2025

“DM क़े जाते ही 200 दुकानों की लॉटरी स्थगित — सवालों से भाग रहे ईओ!”







“DM  क़े जाते ही 200 दुकानों की लॉटरी स्थगित — सवालों से भाग रहे ईओ!”

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश (प्रदीप सिंह )

नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर में जरूरतमंदों को दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी। तत्कालीन जिलाधिकारी राजा गणपति ने बिना किसी दबाव के पारदर्शी लॉटरी सिस्टम तैयार कराया था। मगर उनके स्थानांतरण के बाद जैसे ही राजनीतिक इच्छाएँ जागीं, नगर पालिका ने अचानक पूरी प्रक्रिया रोक दी।स्थानीय लोगों का सीधा आरोप—“राजनीतिक और मानसिक दबाव में निर्णय पलटा गया, नेताओं के चहेतों की सूची तैयार करने की कोशिश चल रही है।”सबसे बड़ा सवाल यह किजब इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए नगर पालिका परिषद के कार्यपालक अधिकारी (ईओ) से बात की गई, तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। क्या वे सवालों से बच रहे हैं?या फिर ऊपर से मिली “चुप्पी” की हिदायत है?जनता का हक़ दबा तो जवाबदेह कौन?

जनता की आवाज“ 200 दुकानों की लॉटरी पर विराम — नेताओं के आशीर्वाद से दलालों की सक्रियता चरम पर”,नगर पालिका परिषद के इस कदम ने शंका और संदेह को और गहरा कर दिया है।अब नवागत जिलाधिकारी पर निगाहें टिकी हैं—क्या वे अपने पूर्ववर्ती DM की मंशा का सम्मान करेंगे?या राजनीतिक दबाव में झुककर जनता के हक़ की कब्र पर चुप्पी साध लेंगे? ईओ ने फोन नहीं उठाया — सवालों से भाग रहे अफसर?” जनता के हक़ की दुकानों पर तालाबंदी”

“पारदर्शिता की हत्या! सिद्धार्थनगर में प्रक्रियाएँ नेताओं के घर गिरवी?”
“ईओ की चुप्पी, पालिका की मनमानी — दुकानों की लॉटरी पर रोक”
“जबाबदेही हवा हो गई, जनता की जेब में राजनीति



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