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मंगलवार, 7 जुलाई 2026

भर्ती फाइलों में कैद 41 डॉक्टर, सरकारी अस्पतालों में मरीज बेहाल

 

41 डॉक्टरों की भर्ती सात माह से अधर में, सीएमओ कार्यालय में 'सौदेबाजी' के आरोप; मरीजों की जिंदगी दांव पर


एनएचएम के तहत चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति पत्र जारी नहीं, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं।

बस्ती।सम्वाददाता, 272001

 जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत 41 डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बावजूद पिछले सात महीनों से नियुक्ति अटकी हुई है। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को जानबूझकर रोका गया है और नियुक्ति को लेकर भारी लेन-देन की चर्चा आम हो गई है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि हजारों मरीजों के जीवन से खिलवाड़ भी है।

सूत्रों के अनुसार डॉक्टरों के दस्तावेजों का सत्यापन, लिखित परीक्षा तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। केवल साक्षात्कार और नियुक्ति पत्र जारी होना बाकी है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से महीनों से न तो इंटरव्यू की तिथि घोषित की जा रही है और न ही अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब दिया जा रहा है। इस बीच जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। मरीजों को रेफर किया जा रहा है, लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और निजी अस्पतालों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। गरीब मरीजों पर इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

भर्ती प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि सात महीने से वे नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। उनका आरोप है कि शिकायत करने पर भविष्य में नुकसान पहुंचने का डर बना रहता है, इसलिए अधिकांश लोग खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।

चर्चा यह भी है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित रूप से मोटी रकम की मांग की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच में यह सच साबित होता है तो यह स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।

जिले में जिन पदों पर भर्ती प्रस्तावित है, उनमें महिला चिकित्साधिकारी, कम्युनिटी प्रोग्राम, टेलीमेडिसिन, गैर संचारी रोग, टीबी सेंटर, राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन, आरोग्य मंदिर तथा ब्लड बैंक जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। इन पदों के खाली रहने से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो नियुक्ति पत्र जारी करने में आखिर बाधा क्या है? यदि कोई प्रशासनिक समस्या है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यदि भ्रष्टाचार की आशंका है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

कौटिल्य का भारत का मत:सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि जनता के जीवन और स्वास्थ्य का प्रश्न है। भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या अनियमितता की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। यदि सब कुछ नियमानुसार है तो 41 डॉक्टरों को तत्काल नियुक्ति दी जाए, ताकि जिले की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को राहत मिल सके और जनता का विश्वास बना रहे।

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