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मंगलवार, 7 जुलाई 2026

सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े का 'साम्राज्य'! आखिर किसके संरक्षण ड़ेइडीहा में कानून हुआ बौना?

 





सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े का 'साम्राज्य'! आखिर किसके संरक्षण  ड़ेइडीहा में कानून हुआ बौना?



भानपुर (बस्ती)। तहसील भानपुर के ग्राम    ड़ेइडीहा    में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्ज़े का मामला अब केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है। शिकायतकर्ता रहमान सिद्दीकी का आरोप है कि ग्राम समाज और कथित गढ़ी/तालाब की भूमि पर वर्षों से कब्ज़ा कर दो-दो और तीन-तीन मंज़िला पक्के मकान खड़े कर दिए गए, लेकिन कार्रवाई आज तक कागज़ों से बाहर नहीं निकल सकी।
आरोप है कि बार-बार शिकायतें राजस्व परिषद, जिलाधिकारी, तहसील और थाना तक पहुँचीं। बुलडोज़र भी पहुँचा, लेकिन बिना कार्रवाई लौट गया। यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठता है कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण हटाने से प्रशासन को किसने रोका?
शिकायतकर्ता ने कुछ लोगों के नाम लेकर आरोप लगाया है कि उन्होंने सरकारी भूमि पर कब्ज़ा किया है। इन आरोपों की निष्पक्ष जाँच प्रशासन के लिए आवश्यक है। यदि भूमि वास्तव में सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, तो अब तक उसे अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं कराया गया?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि आम नागरिक सरकारी भूमि पर एक ईंट भी रख दे तो तत्काल कार्रवाई हो जाती है, लेकिन वर्षों से बने कथित पक्के निर्माण किसकी छत्रछाया में खड़े रहे? क्या राजस्व विभाग की रिपोर्टों को अनदेखा किया गया, या फिर कहीं न कहीं प्रशासनिक तंत्र की विफलता सामने आ रही है?
'कौटिल्य का भारत' जिलाधिकारी और राजस्व विभाग से मांग करता है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, भूमि अभिलेख सार्वजनिक किए जाएँ और यदि आरोप सही पाए जाएँ तो किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण दिए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। सरकारी भूमि पर कब्ज़ा केवल राजस्व का प्रश्न नहीं, बल्कि कानून के शासन की परीक्षा भी है।

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