केवल जयंती नहीं, राष्ट्रचेतना का संस्कार: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर स्थापित विद्यालय में विचार और सेवा का संगम
बस्ती। किसी महापुरुष का सम्मान केवल उसकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने से नहीं होता, बल्कि उसके विचारों को नई पीढ़ी के जीवन का संस्कार बनाने से होता है। इसी भावना के साथ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उनके नाम से स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंटर कॉलेज, जिगना (बस्ती) में राष्ट्रवादी विचार गोष्ठी, छात्र सम्मान एवं सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
विश्व के सबसे कम आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने वाले महान शिक्षाविद्, राष्ट्रवादी चिंतक और भारतीय एकता के अमर प्रहरी डॉ. मुखर्जी के जीवन पर मुख्य वक्ता राजेश प्रताप सिंह 'बागी' ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन बताता है कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराए।
जिला सहसंयोजक प्रेम शंकर ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जिस आत्मविश्वासी और अखंड भारत का स्वप्न देखा था, उसे सुरक्षित रखना आज की युवा पीढ़ी का दायित्व है। राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की चेतना का विषय है।
कार्यक्रम में भाजपा सदर मंडल अध्यक्ष सुधांशु त्रिपाठी, महामंत्री प्रेम शंकर चौधरी, प्रधानाचार्य सुजीत कुमार श्रीवास्तव, राम प्रसाद यादव, राघवेन्द्र भट्ट सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सबसे प्रेरक पक्ष वह था जब जिला सहकारी बैंक के सहयोग से विद्यार्थियों को ड्राइंग किट वितरित की गई। सीमित संसाधनों में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के चेहरों पर उभरी मुस्कान इस बात का प्रमाण थी कि छोटे-छोटे सहयोग भी बड़े सपनों को आकार दे सकते हैं। बच्चों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई।
विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण कराने तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से साधनहीन विद्यार्थियों को संस्कार, शिक्षा और राष्ट्रभावना से जोड़कर भारत की मुख्यधारा का समर्थ नागरिक बनाना है। जिला सहकारी बैंक के अमित प्रबोध के सहयोग की उपस्थित जनों ने सराहना की।
"कौटिल्य का भारत" मानता है कि राष्ट्र का भविष्य संसदों से पहले विद्यालयों में लिखा जाता है। यदि शिक्षा में संस्कार, विचार में राष्ट्र और सेवा में संवेदना का समन्वय बना रहे, तो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरुषों की जयंती केवल एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का सतत अभियान बन जाती है।
यह शैली समाचार के साथ वैचारिक गहराई भी देती है, जो "कौटिल्य का भारत" की विशिष्ट पहचान बन सकती है।आभार राजेंद्र नाथ तिवारी ने किया.

बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं 🎉🙏🙏🙏🙏
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