विशेष स्थानीय संपादकीय | बस्ती संस्करण
बस्ती का एथनॉल युद्ध
दसिया में ५०० करोड़ की फैक्ट्री
विकास की आँधी या विनाश की आग?
बस्ती, 272001
भाजपा में आमने-सामने, ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन में दुविधा"वाल्टरगंज की चीनी मिल बंद होने के बाद बस्ती को मिला यह एथनॉल प्लांट, वरदान है या अभिशाप? यह सवाल अब पूरे जनपद को दो खेमों में बाँट रहा है।"ताज़ा स्थिति : ग्राम दसिया, तहसील भानपुर, थाना रुधौली में अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लगभग ३५०-५०० करोड़ रुपये की लागत से एथनॉल फैक्ट्री का निर्माण जारी है। २५ से अधिक गाँवों के ग्रामीण विरोध में हैं, और कल की दिशा बैठक में भाजपा के अपने जनप्रतिनिधि आपस में भिड़ गए।१. क्या है यह एथनॉल प्लांट , पूरी तस्वीर,वाल्टरगंज शुगर मिल बंद होने के बाद बस्ती जनपद में औद्योगिक शून्यता आ गई थी। इसी पृष्ठभूमि में सल्टौआ गोपालपुर विकास खण्ड के ग्राम दसिया में अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड ने एथनॉल उत्पादन के लिए एक विशाल कारखाने का निर्माण आरंभ किया है।
कंपनी के अनुसार ,लागत : लगभग ३५०-५०० करोड़ रुपयेउत्पादन : धान, मक्का और भूसी से,एथनॉल,प्रत्यक्ष रोजगार : लगभग ७०० लोग,अप्रत्यक्ष रोजगार : लगभग २,००० लोगउद्देश्य : केंद्र सरकार की एथनॉल ब्लेंडिंग नीति (E20) का समर्थन
एथनॉल फैक्ट्री के लाभ , समर्थकों का पक्ष,आर्थिक लाभ,हर्रैया विधायक अजय सिंह और कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यह फैक्ट्री बस्ती की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी ,वाल्टरगंज शुगर मिल बंद होने के बाद औद्योगिक रिक्तता भरेगी,७०० प्रत्यक्ष और २,००० अप्रत्यक्ष रोजगार — बेरोजगार युवाओं को राहतकिसानों को धान-मक्का का औद्योगिक बाज़ार मिलेगा, MSP से ऊपर मूल्य संभवजनपद का औद्योगिक मानचित्र बदलेगा, निवेश आकर्षित होगासरकार को GST एवं अन्य करों से राजस्व प्राप्ति
राष्ट्रीय ऊर्जा नीति में योगदान::केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि २०२५ तक पेट्रोल में २०% एथनॉल मिश्रण (E20) हो। इस लक्ष्य को पूरा करने में बस्ती जैसे कृषि-प्रधान जनपदों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। एथनॉल आयातित पेट्रोलियम की निर्भरता घटाता है और विदेशी मुद्रा बचाता है।
भारत की आयात-निर्भरता में कमी::कार्बन उत्सर्जन में कमी — पर्यावरण अनुकूल ईंधनकिसानों की फसल का सुनिश्चित औद्योगिक उपयोग,कंपनी का दावा : 'फैक्ट्री पूरे मानक और नियमों के अनुसार बन रही है। इससे किसानों और बेरोजगारों को सर्वाधिक लाभ होगा।' — निदेशक सुधीर जायसवाल, एथनॉल फैक्ट्री की हानियाँ — ग्रामीणों का पक्ष पर्यावरण और स्वास्थ्य का संकट,२५ से अधिक गाँवों के ग्रामीण और जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी का कहना है कि यह फैक्ट्री जनजीवन के लिए गंभीर खतरा है —फैक्ट्री के २०० मीटर के दायरे में दो सरकारी विद्यालय हैं बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रश्नआसपास १४-१५ गाँव बसे हैं लाखों लोग सीधे प्रभावित होंगेएथनॉल उत्पादन में भारी मात्रा में पानी की खपत — भूजल संकट,फैक्ट्री से निकलने वाली दुर्गंध और वायु प्रदूषण,औद्योगिक अपशिष्ट से भूमि और जल स्रोतों का प्रदूषण
भूमि और कृषि पर प्रभाव::देश के अन्य भागों छत्तीसगढ़, राजस्थान के अनुभव बताते हैं कि एथनॉल संयंत्रों के कारण कृषि भूमि का अधिग्रहण और किसानों का विस्थापन,भारी वाहनों के कारण ग्रामीण सड़कों का विनाश,किलो धान के लिए २५०० से ३००० लीटर पानी यही पानी फैक्ट्री भी माँगेगीकिसान के खेत और फैक्ट्री के बीच जल-संघर्ष
सामाजिक और राजनीतिक विवाद::इस फैक्ट्री ने बस्ती में अजीब स्थिति बना दी है भाजपा के ही दो नेता हर्रैया विधायक अजय सिंह (समर्थन में) और जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी (विरोध में) आमने-सामनेकल की दिशा बैठक में दोनों के बीच तीखी बहस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरलग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी हैजिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी का स्पष्ट वक्तव्य : 'मानव स्वास्थ्य एवं वातावरण की दृष्टि से एथनॉल फैक्टरी नुकसानदायक है। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। फैक्टरी का विरोध होगा।'
लाभ-हानि : एक दृष्टि में लाभ हानि७०० प्रत्यक्ष रोजगार सरकारी स्कूल २०० मीटर दायरे मेंकिसानों को नया बाज़ार१४-१५ गाँवों पर प्रदूषण का खतरा,औद्योगिक विकासभूजल का अत्यधिक दोहन,वाल्टरगंज मिल का विकल्पग्रामीण सड़कों का विनाश,E20 नीति में योगदान,भूमि अधिग्रहण का भय,विदेशी मुद्रा बचतवायु-दुर्गंध और जल प्रदूषणसंपादकीय दृष्टिकोण — न अंधा समर्थन, न अंधा विरोध::बस्ती जनपद को विकास चाहिए — यह निर्विवाद सत्य है। वाल्टरगंज शुगर मिल बंद होने के बाद जो औद्योगिक शून्यता आई है, उसे भरने की आवश्यकता है। किन्तु विकास की कीमत यदि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण है, तो वह विकास नहीं, विनाश है।कौटिल्य का भारत दैनिक' का स्पष्ट मत है —यह फैक्ट्री यदि मानकों का पूरी तरह पालन करती है — पर्यावरणीय अनुमति, प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रबंधन — तो समर्थन योग्य है,किन्तु स्कूलों के २०० मीटर दायरे में स्थापना अस्वीकार्य है , इसे पुनर्विचार करना होगा
२५ गाँवों का एकजुट विरोध केवल 'निजी दृष्टिकोण' नहीं है — यह जनभावना है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकतास्वतंत्र पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (EIA) सार्वजनिक होना चाहिएभाजपा के अपने नेताओं का विभाजन बताता है कि यह मुद्दा विशुद्ध राजनीतिक नहीं, वास्तविक हैन विकास को रोको, न जनता को मरने दो , बीच का रास्ता है पारदर्शी EIA, सुरक्षित दूरी और ग्रामीणों से सहमति।माँग — प्रशासन और सरकार से,कौटिल्य का भारत दैनिक' की ओर से प्रशासन, सरकार और कंपनी से माँग तत्काल स्वतंत्र पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) सार्वजनिक किया जाए,,विद्यालयों और आवासीय क्षेत्रों से न्यूनतम ५०० मीटर की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित हो२५ गाँवों की ग्राम पंचायतों से औपचारिक सहमति ली जाए,जल दोहन की मात्रा सार्वजनिक की जाए और भूजल संरक्षण की गारंटी दी जाएरोजगार में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता की लिखित प्रतिबद्धताप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नियमित और सार्वजनिक निरीक्षण"बस्ती को कारखाना चाहिए, श्मशान नहीं। विकास और जनस्वास्थ्य — दोनों साथ-साथ चल सकते हैं, बशर्ते नीयत साफ़ हो!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें