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गुरुवार, 18 जून 2026

बस्ती और संतकबीरनगर के 16 विद्यालयों की मान्यता रद्द


 शिक्षा के नाम पर चल रही खानापूर्ति पर यूपी बोर्ड का बड़ा प्रहार


बस्ती और संतकबीरनगर के 16 विद्यालयों की मान्यता रद्द

बस्ती, सम्वाददाता, 272001 

सांकेतिक  इमेज  

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा 465 वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने का निर्णय शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। बोर्ड का कहना है कि जिन विद्यालयों ने लगातार दो वर्षों तक न तो नियमित कक्षाएं संचालित कीं और न ही अपने छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं में सम्मिलित कराया, उनकी मान्यता समाप्त करना आवश्यक हो गया था। यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।बस्ती और संतकबीरनगर जनपद भी इस कार्रवाई से अछूते नहीं रहे। इन दोनों जिलों के कुल 16 विद्यालयों की मान्यता निरस्त कर दी गई है।

बस्ती जनपद के जिन विद्यालयों की मान्यता रद्द हुई


शबनम यूपीएसएसएस, बस्ती,लिटिल फ्लावर हाई स्कूल, कलवारीश्रीमती फूलमती विद्या यूपीएसएस, शाहपुर,पीटी राजन बालिका इंटर कॉलेज, बस्ती,एलएम चौधरी सकलेन बालिका इंटर कॉलेज, बस्त,संतकबीरनगर जनपद के जिन विद्यालयों की मान्यता रद्द हुई,अवध गर्ल्स इंटर कॉलेज, करजाश्रीमती सीजी इंटर कॉलेज, विश्वनाथपुर,एसएमबीजी विद्या मंदिर यूपीएसएस, खलीलाबादप्रभा देवी गर्ल्स इंटर कॉलेज, तुंगपार,एस. शंकर चतुर्वेदी इंटर कॉलेज, तुंगपार,पीटी रजत इंटर कॉलेज, परवता मड़सीवाप्रभा देवी कन्या विद्यालय, खलीलाबाद,लाती श्री जगबली प्रसाद इंटर कॉलेज, बरसाल,राजन बालिका इंटर कॉलेज, भिटा मड़सीव,श्रीमती शांति देवी बालिका इंटर कॉलेज, नब्बीरिया,लोलाराम रामदुलारी यूपीएमवी, खलीलाबाद,यह सूची केवल विद्यालयों के नामों की नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उस विडंबना की भी कहानी कहती है जिसमें कुछ संस्थान वर्षों तक केवल मान्यता के आधार पर अस्तित्व बनाए रखते हैं, जबकि वहां न पर्याप्त छात्र होते हैं और न ही शैक्षणिक गतिविधियां। शिक्षा के नाम पर चल रही ऐसी खानापूर्ति अंततः विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय ही है।

किसी भी विद्यालय की पहचान उसके भवन या बोर्ड से नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले छात्रों, पढ़ाने वाले शिक्षकों और संचालित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों से होती है। यदि विद्यालय में कक्षाएं ही नहीं चल रहीं, छात्र बोर्ड परीक्षा तक नहीं पहुंच रहे, तो ऐसी संस्थाओं का बने रहना शिक्षा की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

यूपी बोर्ड की यह कार्रवाई उन सभी संस्थानों के लिए चेतावनी है जो केवल कागजी अस्तित्व के सहारे व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। साथ ही यह अवसर भी है कि शिक्षा विभाग विद्यालयों के नियमित निरीक्षण, छात्र उपस्थिति और शिक्षण गुणवत्ता की सतत निगरानी सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।


कौटिल्य उवाच


"विद्यालय राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला हैं। यदि वहां ज्ञान का दीपक नहीं जलता, तो केवल भवन और मान्यता समाज को प्रकाश नहीं दे सकते। शिक्षा के नाम पर चल रहे दिखावे का अंत होना ही चाहिए, क्योंकि राष्ट्र का भविष्य किसी कागजी विद्यालय में नहीं, बल्कि जीवंत शिक्षण संस्थानों में निर्मित होता है।"


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