हर्रैया का “लिटिल फ्लावर” प्रकरण: आखिर किसके संरक्षण में दब रही शिकायतें?
बस्ती, वशिष्ठ नगर, संवाददाता
विश्व हिंदू परिषद के नेता विवेक कुमार सिंह द्वारा हर्रैया स्थित कथित ईसाई मिशनरी संचालित “लिटिल फ्लावर स्कूल” के विरुद्ध मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर शिकायत देने और बाद में आईजीआरएस पर प्रार्थना-पत्र दर्ज कराने के बावजूद आज तक कोई निर्णायक कार्रवाई न होना अब पूरे क्षेत्र में गंभीर चर्चा और आक्रोश का विषय बन चुका है।स्थानीय हिंदू संगठनों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विद्यालय की गतिविधियों, धर्मांतरण की आशंकाओं, सांस्कृतिक हस्तक्षेप तथा मनोरमा नदी को प्रदूषित करने जैसे गंभीर आरोपों के बाद भी प्रशासनिक मशीनरी की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा खुले रूप से हो रही है कि आखिर ऐसा कौन-सा “अदृश्य संरक्षण” है जिसके कारण इतने संवेदनशील मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही। लोगों में यह भावना तेजी से बढ़ रही है कि कहीं न कहीं प्रभावशाली स्तर पर मामला दबाने का प्रयास किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि दूसरे मामलों में सरकार अवैध निर्माण और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल बुलडोजर कार्रवाई कर सकती है, तो फिर इस मामले में जांच और वैधानिक कार्रवाई से परहेज क्यों? जनता यह जानना चाहती है कि क्या कानून सबके लिए समान है या कुछ संस्थानों को विशेष संरक्षण प्राप्त है।
क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकरण ने बस्ती और हर्रैया के हिंदू संगठनों के भीतर गहरी निराशा उत्पन्न की है। उनका आरोप है कि यदि हिंदू समाज की आस्था, संस्कृति और स्थानीय पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी कार्रवाई नहीं होगी, तो इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।अब मांग उठ रही है कि—पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो,विद्यालय की वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा हो,धर्मांतरण संबंधी आरोपों की कानूनी जांच कराई जाए,
मनोरमा नदी प्रदूषण मामले पर पर्यावरण विभाग रिपोर्ट सार्वजनिक करे,और सरकार स्पष्ट करे कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो यह मामला सामाजिक अविश्वास और जनाक्रोश का बड़ा कारण बन सकता है।

जल्दी से जल्दी इसपर कार्यवाही करें प्रशासन
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