आदेशों की अनदेखी ने ली एक और जान: नोएडा में छात्र की दर्दनाक मौत
गौतम बुद्ध नगर। नोएडा में लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सेक्टर-94 स्थित सुपर नोवा बिल्डिंग के पीछे बने पानी से भरे गड्ढे में डूबकर एक छात्र की मौत ने एक बार फिर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले सेक्टर-150 में इसी तरह की घटना में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान जा चुकी थी, और अब 23 वर्षीय छात्र हर्षित भट्ट की मौत ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को संबंधित स्थल पर पानी भरे होने की जानकारी पहले से थी। यहां तक कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे, लेकिन अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा इन आदेशों की अनदेखी की गई। यही लापरवाही अंततः एक युवा की जान पर भारी पड़ गई।
बताया जाता है कि घटना उस समय हुई जब एमिटी यूनिवर्सिटी के बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन के छात्र हर्षित भट्ट अपने दो दोस्तों के साथ परीक्षा समाप्त होने की खुशी मना रहा था। तीनों युवक गड्ढे में भरे पानी के पास पहुंचे, जहां नहाने के दौरान हर्षित गहरे दलदल में फंस गया। दोस्तों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।
इस हृदयविदारक घटना ने एक सैनिक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है। मृतक के पिता लद्दाख में भारतीय सेना में तैनात हैं, जबकि मां ने इस घटना को हत्या बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की जांच कर रहे डीसीपी शाद मियां खान ने कहा है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है।
इधर, प्राधिकरण के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करते हैं। यहां तक आरोप है कि मुख्य कार्यपालक अधिकारी को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित “कॉकस” सक्रिय है, जिसमें कुछ राजनीतिक तत्व भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पहले भी अवैध निर्माणों को हटाने के आदेशों का पालन न होने के मामले सामने आ चुके हैं।
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही के अभाव का जीवंत उदाहरण बन गई है। सवाल यह है कि जब अधिकारियों को खतरे की जानकारी थी और कार्रवाई के आदेश भी दिए जा चुके थे, तो फिर क्यों नहीं उठाए गए ठोस कदम?
अब देखना यह है कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, एक मासूम जिंदगी के चले जाने के बाद व्यवस्था पर उठ रहे सवाल और भी तेज हो गए हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें