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शनिवार, 18 अप्रैल 2026

*“कोरोना योद्धा भर्ती नहीं, लूट का लाइसेंस था

 *“कोरोना योद्धा भर्ती नहीं, लूट का लाइसेंस था!”

मेडिकल कॉलेज में ‘फर्जी नियुक्तियों’ से करोड़ों का खेल उजागर**



बस्ती। कोरोना काल में जहां एक ओर असली योद्धा अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में ‘कोरोना योद्धा भर्ती’ के नाम पर जमकर बंदरबांट की गई। ताज़ा खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि यह भर्ती नहीं, बल्कि सुनियोजित घोटाला था, जिसमें विभागीय मिलीभगत की बू साफ आ रही है।आरोप है कि ऐसे लोगों को पैसे लेकर नौकरी दे दी गई, जिन्होंने कभी मेडिकल कॉलेज में काम तक नहीं किया। सवाल उठता है कि बिना विज्ञापन प्रक्रिया पूरी हुए भर्ती कैसे हो गई? और अगर बाद में विज्ञापन निकाला गया, तो पहले से नियुक्तियां किस आधार पर कर दी गईं?

सूत्रों के मुताबिक, करीब 15 भर्तियों में आउटसोर्सिंग एजेंसी की सीधी भूमिका सामने आ रही है। इन भर्तियों में फर्जी दस्तावेज, उपस्थिति रजिस्टर, ईपीएफ और वेतन खातों तक में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।शिकायत के बाद अब मामला तूल पकड़ चुका है। जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच से सच सामने आएगा या फिर हर बार की तरह फाइलों में ही ‘दफन’ कर दिया जाएगा?

यह भी सामने आया है कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि बिना “ऊपर तक सेटिंग” के इतना बड़ा खेल संभव नहीं। हर महीने मोटी रकम के लेन-देन के बाद ही भुगतान होता है, जिससे साफ है कि यह सिर्फ छोटे कर्मचारियों का खेल नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत है।अब सवाल सीधे हैं—क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?क्या फर्जी भर्ती रद्द कर दोषियों पर मुकदमा चलेगा?या फिर ‘कोरोना योद्धा’ के नाम पर हुई इस लूट पर पर्दा डाल दिया जाएगा? या कथित दुर्भासन्धि के भ्र्ष्टाचार का अनावरण होगा.

ज्ञातव्य है अभी मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य के लोकायुक्त से सवालों का सामना भ्र्ष्टाचार के मामले मेँ करनापड़ रहा है.

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