लोकायुक्त की जाँच में घिरे डॉ. मनोज कुमार, निलंबन की तलवार लटकी — संपत्तियों की परत-दर-परत होगी पड़ताल
बस्ती। संवाददाता वी के त्रिपाठी
विष्णु देव मिश्रा शिकायत कर्त्ता की मेहनत, कथित आर्थिक कदाचार के घेरे मेँ प्रिंसपल,बस्ती मेडिकल कॉलेज में कथित अनियमितताओं और उपकरण खरीद घोटाले को लेकर घिरे डॉ. मनोज कुमार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है, जहाँ लोकायुक्त की जाँच ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।सूत्रों के अनुसार, लोकायुक्त द्वारा की जा रही जांच में प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर शासन स्तर पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। यदि रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होती है, तो चिकित्सा शिक्षा विभाग कभी भी डॉ. मनोज कुमार को निलंबित कर सकता है या जांच पूरी होने तक पद से हटाने का आदेश दे सकता है, ताकि साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
मामले की सबसे अहम कड़ी अब संपत्तियों की जांच बन चुकी है। डॉ. मनोज कुमार को अपनी और अपने परिवार की चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्यौरा देना होगा। इस विवरण का मिलान उनके सेवा अभिलेखों और अब तक जमा किए गए वार्षिक संपत्ति विवरण से किया जाएगा। यदि इसमें किसी प्रकार का अंतर या अघोषित संपत्ति सामने आती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
जानकारों का मानना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं या भ्रष्टाचार के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एफआईआर दर्ज होने और आपराधिक मुकदमे तक जा सकता है।
इस पूरे प्रकरण ने बस्ती मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उपकरणों की खरीद से जुड़े पुराने विवाद भी अब फिर से चर्चा में आने लगे हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह सकता। अब नजरें टिकी हैं लोकायुक्त की अंतिम रिपोर्ट पर, जो यह तय करेगी कि यह मामला महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर बड़े स्तर का भ्रष्टाचार।जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना है।
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