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गुरुवार, 26 मार्च 2026

“भ्रष्टाचार का रक्तबीज: कानून हार रहा या सिस्टम बिक चुका है?”


 रक्तबीज का साम्राज्य: जब भ्रष्टाचार हर बूंद से जन्म लेता है!वही "रक्तबीज "!

राजेंद्र नाथ तिवारी, प्रासंगिक लेख, 27मार्च, 26,समय 11.35 दोपहर 


मार्कण्डेय पुराण /दुर्गा सप्तश्ती,कथाओं में एक राक्षस था—रक्तबीज। उसे जितनी बार मारा जाता, उसकी हर गिरती बूंद से एक नया रक्तबीज खड़ा हो जाता। युद्ध चलता रहता, शत्रु बढ़ता जाता, और अंततः यह स्पष्ट हो गया कि समस्या राक्षस नहीं, उसकी बूंदें हैं।आज का भारत उसी रक्तबीज से जूझ रहा है—नाम है भ्रष्टाचार। समस्या व्यक्ति नहीं, व्यवस्था है ।हम हर दिन किसी न किसी “भ्रष्ट अधिकारी” के पकड़े जाने की खबर सुनते हैं। मीडिया शोर मचाता है, प्रशासन कार्रवाई दिखाता है, और जनता कुछ देर के लिए संतुष्ट हो जाती है। लेकिन कुछ ही दिनों में वही कहानी, वही पैटर्न, वही अपराध फिर सामने आ जाता है।

क्यों? क्योंकि हम व्यक्ति को पकड़ते हैं, व्यवस्था को नहीं।हम घटना पर प्रहार करते हैं, प्रणाली को छोड़ देते हैं।भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं रहा—यह प्रशासनिक संस्कृति बन चुका है।“छोटा भ्रष्टाचार” सबसे बड़ा अपराध।हम अक्सर बड़े घोटालों पर चर्चा करते हैं—हजारों करोड़, बड़े नाम, बड़ी सुर्खियां। लेकिन असली जहर वहां नहीं है।

असली रक्तबीज है:थाने में “चाय-पानी”तहसील में “फाइल आगे बढ़ाने” का पैसा

अस्पताल में “बिस्तर दिलाने” की दलालीयही वो बूंदें हैं, जिनसे हजारों नए रक्तबीज रोज जन्म लेते हैं।और सच यह है—समाज भी इसमें सहभागी और  आदि बन चुका है। जब आम नागरिक “काम जल्दी कराने” के लिए रिश्वत देता है, तब वह भी उस रक्तबीज को जन्म दे रहा होता है, जिसे वह कोसता है।

 कानून क्यों हार रहा है?कानून कठोर हैं, एजेंसियां सक्रिय हैं, फिर भी भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा। कारण स्पष्ट है:कार्रवाई चयनात्मक हैसजा देर से और कम होती है,सिस्टम में जवाबदेही कमजोर है। यानी तलवार चल रही है, लेकिन घाव गलत जगह पड़ रहा है।

 समाधान: काली का दृष्टिकोणपुराणों में रक्तबीज का अंत तब हुआ जब माँ काली ने उसकी हर बूंद को जमीन पर गिरने से पहले ही समाप्त कर दिया। यह केवल शक्ति का नहीं, रणनीति का प्रतीक था।आज के भारत को भी वही रणनीति चाहिए:डिजिटल पारदर्शिता: हर लेन-देन का रिकॉर्डजवाबदेही की श्रृंखला: ऊपर से नीचे तक स्पष्ट जिम्मेदारी तेज न्याय प्रणाली: वर्षों नहीं, महीनों में सजा ,नैतिक शिक्षा: बचपन से ईमानदारी का संस्कार,जब तक “बूंद” को नहीं रोका जाएगा, रक्तबीज बढ़ता रहेगा।

 राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतराभ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है। यह राष्ट्र की आत्मा का क्षरण है। यह गरीब के अधिकार को निगलता है,यह प्रतिभा को दबाता है,यह व्यवस्था पर विश्वास खत्म करता है,और जब जनता का विश्वास टूटता है, तो राष्ट्र भीतर से खोखला हो जाता है।अब समय आ गया है कि हम सच्चाई को स्वीकार करें—

भ्रष्टाचार कोई “समस्या” नहीं,यह रक्तबीज का साम्राज्य है।और इस साम्राज्य को खत्म करने के लिए नारे नहीं,कार्यवाही नहीं,बल्कि व्यवस्था का पुनर्निर्माण चाहिए।जब तक हम “रक्तबीज” को मारने की कोशिश करेंगे, वह बढ़ता रहेगा। जिस दिन हम उसकी “हर बूंद” को रोकना सीख जाएंगे,उसी दिन भ्रष्टाचार का अंत शुरू होगा। भारत को बचाना है तो भ्रष्टाचार से लड़ना नहीं उसे जड़ से सुखाना होगा, वरना हर बूंद से नया रक्तबीज जन्म लेता रहेगा।”🙏

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