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सोमवार, 16 मार्च 2026

बिजली विभाग का मीटर परीक्षण केंद्र बना रहस्य केंद्र

 

मीटर परीक्षण खंड में ‘गायब’ फाइलों का खेल! बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल


बस्ती।
क्या सरकारी दफ्तरों में रिकॉर्ड और फाइलों का “गायब” हो जाना अब सामान्य परंपरा बन चुका है? बस्ती में बिजली विभाग के मीटर परीक्षण खंड से सामने आ रही जानकारी ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार इस खंड में कई महत्वपूर्ण फाइलें और मीटर परीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड अचानक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। जब संबंधित कर्मचारियों से इन दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी जाती है, तो जवाब मिलता है कि “फाइल मिल नहीं रही” या “रिकॉर्ड कहीं और भेजा गया है।”
मीटर परीक्षण खंड की अहम भूमिका,बिजली विभाग का मीटर परीक्षण खंड उपभोक्ताओं के मीटरों की जांच और सत्यापन का सबसे महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है।यहीं यह तय किया जाता है कि उपभोक्ता का मीटर सही चल रहा है या उसमें कोई तकनीकी गड़बड़ी है। यदि मीटर में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसी के आधार पर उपभोक्ता पर अतिरिक्त बिल या जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
ऐसे में यदि इसी विभाग के रिकॉर्ड और रिपोर्ट गायब होने लगें तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित गड़बड़ी की आशंका भी पैदा करता है।
उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से मीटर परीक्षण से जुड़े कई मामलों में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना स्पष्ट जांच रिपोर्ट के ही उन्हें भारी भरकम बिल थमा दिए जाते हैं।
जब उपभोक्ता मीटर परीक्षण की रिपोर्ट या रिकॉर्ड देखने की मांग करते हैं, तो विभाग के पास अक्सर संतोषजनक जवाब नहीं होता। अब रिकॉर्ड के गायब होने की बात सामने आने के बाद लोगों की आशंकाएं और बढ़ गई हैं।
क्या घोटाले को छिपाने की कोशिश?सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं रिकॉर्ड गायब होने के पीछे किसी बड़े घोटाले को छिपाने की कोशिश तो नहीं हो रही।
बिजली विभाग में मीटर से जुड़े मामलों में अक्सर भारी आर्थिक लेन-देन की संभावनाएं रहती हैं। ऐसे में यदि रिकॉर्ड ही उपलब्ध न हों तो किसी भी गड़बड़ी की जांच करना मुश्किल हो जाता है।
जांच की मांग तेज सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड गायब होने की घटना सच है तो यह विभागीय अनुशासन और पारदर्शिता दो नों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
लोगों का कहना है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर मीटर परीक्षण खंड से फाइलें और दस्तावेज कैसे और क्यों गायब हो रहे हैं।
प्रशासन की जिम्मेदारी
यदि समय रहते इस मामले की गंभीरता से जांच नहीं हुई तो यह केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं रहेगा, बल्कि भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क की ओर भी संकेत कर सकता है।अब सबकी नजर जिला प्रशासन और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी है कि वे इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और जनता को सच्चाई कब तक सामने आती है।
वी के तिवारी, 16-3-26 सायं 4.30,संवाददाता कौटिल्य का भारत 

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