बस्ती में गैस संकट: जेब ढीली, पसीना छूटा
बस्ती जिले में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत ने आम उपभोक्ताओं को बदहाली की जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया है। जहां पसीना छूट रहा है लंबी कतारों में, वहीं कालाबाजारी के चंगुल में जेबें ढीली हो र
सप्लाई चेन की पोल खुली
बस्ती
Nपिछले 20 दिनों से गैस सिलेंडरों की भारी कमी बनी हुई है, जिसमें 40 एजेंसियों में से केवल 19 पर ही आपूर्ति पहुंची। औसतन 8288 सिलेंडर आने चाहिए थे, लेकिन सप्लाई घटकर न्यूनतम रह गई। जिला प्रशासन दावा करता है कि "गैस की कोई कमी नहीं", मगर जमीनी हकीकत में भानपुर, रुधौली, अमहट घाट जैसी जगहों पर उपभोक्ता घंटों लाइन लगाकर खाली हाथ लौट रहे हैं।
कालाबाजारी का बोलबाला: 1300 से 1700 रुपये
घरेलू सिलेंडरों की कीमत सामान्य से कूदकर 1300-1700 रुपये तक पहुंच गई है – जैसी उठावली, वैसा दम! कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई लगभग ठप होने से होटल, ढाबे, फास्टफूड दुकानें चौपट हैं, और ब्लैक में बिक्री चरम पर। ईरान-इजरायल तनाव के बहाने आयल कंपनियां आपूर्ति घटा रही हैं, जिसका खामियाजा छोटे व्यापारी व गरीब परिवार भुगत रहे।
अधिकारियों के दावे निरर्थक
निरॉन चेन (निर्यात श्रृंखला) की वंशी बाजारहा और व्यान डे (व्यापार मंडल) के नेताओं ने प्रशासन के झूठे दावों पर सवाल ठोक दिए। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष सुनील सिंह व इरफान खान ने चेतावनी दी – सुधार न हुआ तो आंदोलन! डीएम कृत्तिका ज्योत्सना ने पूर्ति निरीक्षक तैनात किए, मगर ओटीपी नियम व केवाईसी की जटिलताओं ने उपभोक्ताओं को और परेशान किया।
उपभोक्ता हाहाकार: चूल्हा ठंडा
पांच लाख से ज्यादा उपभोक्ता प्रभावित, जहां बुजुर्गों की तबीयत बिगड़ रही, बच्चे भूखे पेट सो रहे। रातोंरात एजेंसियों पर पहुंचकर भोर से लाइन लगानी पड़ रही। सप्लाई अधिकारीयों का ओहदा खोखला साबित हो रहा – जिम्मेदारी लो, हल निकालो!
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