ईद पर विशेष, मुसलमान कब समझेगा -भारत: सहिष्णुता की भूमि और जिम्मेदारी का प्रश्न! - कौटिल्य का भारत

Breaking News

Home Top Ad

विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9415671117

Post Top Ad

शनिवार, 21 मार्च 2026

ईद पर विशेष, मुसलमान कब समझेगा -भारत: सहिष्णुता की भूमि और जिम्मेदारी का प्रश्न!

भारत: सहिष्णुता की भूमि और जिम्मेदारी का प्रश्न!

अग्रलेख, राजेंद्र नाथ तिवारी, प्रमुख सम्पादक, कौटिल्यकाभारत, 22मार्च 26,समय 9.22


भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसकी आत्मा विविधता, सहिष्णुता और सहअस्तित्व में बसती है। यहाँ हर धर्म, हर पंथ, हर विचार को न केवल स्थान मिला है, बल्कि सम्मान भी मिला है। यही कारण है कि विश्व के अनेक देशों की तुलना में भारत में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर मुस्लिम समाज, अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन जीता है।यह एक ऐतिहासिक सत्य है कि भारत ने कभी भी अपने नागरिकों के साथ उनके धर्म के आधार पर भेदभाव को राज्य नीति नहीं बनाया। संविधान ने सभी को समान अधिकार दिए, और समाज ने भी समय-समय पर इस भावना को सशक्त किया। लेकिन इसी के साथ एक दूसरा पक्ष भी उभरता है—भ्रम और असंतोष का। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ तत्व, चाहे वे किसी भी समुदाय से हों, भारत की इसी सहिष्णुता को कमजोरी समझ लेते हैं। वे राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भूलकर केवल अधिकारों की बात करते हैं, और कभी-कभी राष्ट्र की छवि को भी आघात पहुँचाते हैं।
यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि भारत में रहने वाला हर नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, सबसे पहले भारतीय है।अधिकारों के साथ कर्तव्य भी अनिवार्य हैं। राष्ट्र को “धर्मशाला” समझने की मानसिकता न केवल अनुचित है, बल्कि समाज को विभाजित करने वाली भी है।आतंकवाद का प्रश्न भी इसी संदर्भ में आता है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन जब कोई व्यक्ति या समूह हिंसा का रास्ता अपनाता है, तो वह पूरे समाज को संदेह के घेरे में ला देता है। ऐसे में सबसे बड़ी जिम्मेदारी उस समाज की होती है कि वह खुलकर ऐसे तत्वों का विरोध करे और राष्ट्र के साथ खड़ा हो।
भारत का मुस्लिम समाज ऐतिहासिक रूप से देशभक्ति, संस्कृति और साझा विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक अनगिनत उदाहरण हैं जहाँ उन्होंने राष्ट्र के लिए योगदान दिया। इसलिए पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करना भी उतना ही गलत है, जितना राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को नजरअंदाज करना।
समाधान का मार्ग संवाद और जागरूकता – भ्रम को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका। शिक्षा और राष्ट्रबोध – नई पीढ़ी को संविधान और कर्तव्यों का बोध।
समान कानून का पालन – सभी के लिए एक जैसा न्याय।
कट्टरता का विरोध – चाहे वह किसी भी धर्म या विचारधारा से हो।

भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि एक जीवंत विचार है—जहाँ विविधता में एकता है। इस विचार को बनाए रखने के लिए हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। देश अधिकार देता है, सुरक्षा देता है, सम्मान देता है—तो बदले में अपेक्षा भी करता है: निष्ठा, कर्तव्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण।
आखिर मुसलमान भारत क़ो अपना और केवल अपना कब मानेगा? शुभकामनायें पवित्र ईद की 🙏🌹

1 टिप्पणी:

Post Bottom Ad