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सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

बस्ती की पत्रकारिता जगत की धरोहर — डिब्बलर आज भी न्यायमार्ग की पहचान

 बस्ती की पत्रकारिता जगत की धरोहर — डिब्बलर आज भी न्यायमार्ग की पहचान


बस्ती।

जनपद बस्ती के न्यायमार्ग और प्रिंट मीडिया जगत में यदि किसी नाम को आत्मीयता और भरोसे के साथ लिया जाता है, तो वह है देवेंद्र नाथ पाण्डेय उर्फ “डिब्बलर”। एक समय ऐसा था जब पत्रकारों को शाम ढलते-ढलते उनकी प्रतीक्षा रहती थी—“डिब्बलर आते ही होंगे।” नेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी विश्वास रहता कि यदि उनकी विज्ञप्ति डिब्बलर के हाथ पहुँची, तो सुबह के अखबार में उसका स्थान सुनिश्चित है।

सूचनाओं को सही जगह पहुँचाना ही उनकी पहचान और सेवा थी। छोटे-बड़े समाचार पत्रों के लिए वे मानो सूचना-प्रवाह की प्राणवायु रहे। उनकी सक्रियता और सहजता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक सेतु के रूप में स्थापित किया—जहाँ संवाद, सम्मान और भरोसा तीनों साथ चलते थे।

समय बदला, तकनीक बदली। आज समाचार और विज्ञप्तियाँ ई-मेल और व्हाट्सअप जैसे माध्यमों से तत्काल पहुँच जाती हैं, लेकिन डिब्बलर का स्वभाव और दिनचर्या नहीं बदली। वे आज भी निर्विकार भाव से न्यायमार्ग पर टहलते मिल जाते हैं—सबकी जय, सबका सम्मान उनके जीवन का मूल भाव रहा है। शायद ही कोई नेता या दल रहा हो जिसने कभी उनकी सेवाओं का उपयोग न किया हो।

सन 1968 में जन्मे डिब्बलर आज 68 वर्ष की आयु में भी जनपद के लिए एक सम्मानित स्मृति और जीवंत परंपरा हैं। उन्हें लोग न्यायमार्ग की धरोहर मानते हैं—एक ऐसा नाम जो पत्रकारिता के उस दौर की याद दिलाता है जब भरोसा ही सबसे बड़ा माध्यम था।

ईश्वर से कामना है कि वे स्वस्थ और दीर्घायु रहें। बस्ती की पत्रकारिता और सामाजिक जीवन में उनकी उपस्थिति एक प्रेरणा और अपनत्व का प्रतीक बनी रहे।

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