माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एव
माननीय UGC अध्यक्ष
महोदय,
विषय: UGC 2026 नियमावली में फर्जी शिकायतों पर सख्त दंड का प्रावधान जोड़ने हेतु सुझाव – राष्ट्रहित में आवश्यक
मैं राजेंद्र नाथ तिवारी कौटिल्य कौटिल्य वार्ता, बस्ती से संबद्ध), उत्तर प्रदेश की एक सांस्कृतिक-राष्ट्रवादी कार्यकर्ता, लेखिक एवं शोधकर्ता के रूप में, UGC की नवीन "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" पर गहन चिंतन के पश्चात् यह पत्र प्रस्तुत कर रहा हू हूँ। राष्ट्र निर्माण के इस युग में शिक्षा का क्षेत्र मजबूत होना अत्यावश्यक है, किंतु वर्तमान नियमावली में फर्जी/दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर कोई दंड न होने से उच्च शिक्षा संस्थानों में अराजकता का खतरा है। सामान्य वर्ग के विद्वान छात्र-शिक्षकों को लक्षित करवाने का भय व्याप्त है, जो राष्ट्र की बौद्धिक पूंजी को क्षति पहुँचाएगा।आपके नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। कौटिल्य अर्थशास्त्र की दृष्टि से दंडनीति राज्य का मूल आधार है – "दुष्टप्राणिनां दण्डः राज्यस्य मूलं"। फर्जी आरोप लगाने वाले को चोरत्व का झूठा इल्जाम देने पर स्वयं उसी दंड का भागी ठहराया जाता था।
वर्तमान संदर्भ में बिल वापस न लेकर मात्र एक पंक्ति जोड़ दें: "फर्जी शिकायत सिद्ध होने पर दोषी को छः वर्ष की गैर-जमानती कारावास, आजीवन अध्ययन-अध्यापन प्रतिबंध तथा समस्त डिग्रियाँ तुरंत रद्द।" इससे निवारक प्रभाव पड़ेगा, मत्स्यन्याय रुकेगा, तथा शिक्षा की गुणवत्ता राष्ट्रहित में सुरक्षित रहेगी।
यह सुझाव कौटिल्य की राष्ट्रवादी नीति से प्रेरित है, जो राज्य संरक्षण एवं न्यायपूर्ण दंड पर बल देता है। उत्तर प्रदेश सहित राष्ट्रभर में चल रहे आंदोलनों को शांत करने हेतु यह व्यावहारिक कदम सिद्ध होगा। कृपया इसे तत्काल लागू कर राष्ट्र को गौरवान्वित करें।बस्ती, उत्तर प्रदेश
दिनांक: 27 जनवरी 2026
राजेंद्र नाथ तिवारी
कौटिल्य वार्ता
(कौटिल्य वार्ता न्यूज ट्रष्ट)
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