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सोमवार, 12 जनवरी 2026

धर्मांतरण नेटवर्क पर शिकंजा: केजीएमयू के बाद बस्ती मेडिकल कॉलेज भी जांच एजेंसियों के रडार पर


धर्मांतरण नेटवर्क पर शिकंजा: केजीएमयू के बाद बस्ती मेडिकल कॉलेज भी जांच एजेंसियों के रडार पर
यौन शोषण, उत्पीड़न और धर्मांतरण के आरोप — खलीलाबाद के समसूल हुदा तक जुड़ते तार

लखनऊ/बस्ती/खलीलाबाद।

धर्मांतरण, यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की जांच अब केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियों के रडार पर अब बस्ती मेडिकल कॉलेज का नाम भी उभर कर सामने आ रहा है। सूत्रों के अनुसार, पूर्वांचल के कुछ मेडिकल संस्थानों में एक जैसे पैटर्न मिलने से एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।# केजीएमयू से निकला धुआं, पूर्वांचल तक फैलती आंच,बताया जा रहा है कि केजीएमयू में—
हिंदू महिला डॉक्टरों व छात्राओं का यौन शोषण#मानसिक दबाव बनाकर धर्मांतरण#धार्मिक उत्पीड़न की शिकायतें
जैसे गंभीर आरोप सामने आने के बाद जब जांच आगे बढ़ी, तो बस्ती मेडिकल कॉलेज और संत कबीर नगर (खलीलाबाद) से जुड़े कुछ नाम और संपर्क भी जांच के दायरे में आते दिखे।
 मौलानाओं की आवाजाही और संदिग्ध संपर्क

सूत्र बताते हैं कि—बस्ती मेडिकल कॉलेज परिसर और हॉस्टल क्षेत्र में बाहरी मौलानाओं की आवाजाही को लेकर सवाल उठे हैं,कुछ मामलों में धार्मिक बैठकों और निजी मुलाकातों की जानकारी जांच एजेंसियों के संज्ञान में आई है
खलीलाबाद से जुड़े समसूल हुदा नामक व्यक्ति के संपर्कों को भी जांच में खंगाला जा रहा है
हालांकि एजेंसियों ने अभी औपचारिक रूप से किसी को दोषी नहीं ठहराया है, लेकिन कड़ियों का जुड़ना चिंता बढ़ाने वाला है। इलाज के केंद्र या वैचारिक प्रयोगशाला?
राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या मेडिकल कॉलेज, जो जीवन बचाने के केंद्र हैं,
धर्मांतरण और वैचारिक दबाव के अड्डे बनते जा रहे हैं?यदि मेडिकल छात्र और डॉक्टर ही मानसिक, वैचारिक और धार्मिक दबाव में आ रहे हैं, तो यह स्वास्थ्य तंत्र ही नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन जाता है।प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में
अब सवाल केवल व्यक्तियों पर नहीं, संस्थागत जिम्मेदारी पर भी है—क्या मेडिकल कॉलेज प्रशासन को गतिविधियों की जानकारी नहीं थी?क्या हॉस्टल और कैंपस में बाहरी लोगों की एंट्री की निगरानी हुई?क्या धार्मिक गतिविधियों की आड़ में नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई?अगर यह सब अनदेखी में हुआ, तो यह लापरवाही है;और अगर जानकारी होते हुए हुआ, तो यह संरक्षण माना जाएगा। राष्ट्रवादी चेतावनी,यह खबर किसी धर्म के खिलाफ नहीं है,
बल्कि धर्म की आड़ में चल रही कथित साजिशों के खिलाफ है।मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बनेंगे या वैचारिक मोहरे?
इलाज होगा या पहचान बदली जाएगी?राष्ट्र अब जवाब चाहता है।

जांच एजेंसियों को चाहिए कि—#केजीएमयू के साथ बस्ती मेडिकल कॉलेज और खलीलाबाद कनेक्शन की गहन जांच करें
हॉस्टल, फंडिंग, संपर्क और आवाजाही का फोरेंसिक ऑडिट हो दोषी चाहे छात्र हो, डॉक्टर हो या बाहरी व्यक्ति — कड़ी कार्रवाई हो#राष्ट्र की चिकित्सा व्यवस्था पर कोई प्रयोग स्वीकार नहीं। सूत्र बताते है अधिकाश मेडिकल कालेज फ्लैह  कि और तो नहीं जारहे.

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