बस्ती
सत्येंद्र सिंह
कुत्ते (चमचे): ये वे लोग हैं जो नेता के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं – चापलूस, समर्थक या अनुयायी जो खुद को बहुत महत्वपूर्ण समझते हैं। वे गाड़ी के नीचे दौड़ते हुए सोचते हैं कि गाड़ी का पूरा बोझ वे ही उठा रहे हैं, यानी राजनीति उनके बिना नहीं चल सकती।
गाड़ी रुकने पर पता चलना: जब राजनीतिक स्थिति बदलती है, नेता गिरता है या गाड़ी रुक जाती है (जैसे चुनाव हारना, सत्ता से बाहर होना), तब इन चमचों को हकीकत पता चलती है। वे समझते हैं कि गाड़ी बैलों (मुख्य शक्तियों) से चल रही थी, न कि उनके दौड़ने से। कुत्तों (चमचों) और गाड़ी के 'अंतर' (difference) से मतलब है कि उनकी भूमिका नगण्य थी – वे सिर्फ शोर मचा रहे थे, असली काम तो बैल कर रहे थे।
यह कथन राजनीति में चापलूसी और आत्म-मुग्धता पर व्यंग्य करता है। यह बताता है कि सच्चे योगदानकर्ता चुपचाप काम करते हैं, जबकि चमचे सिर्फ दिखावा करते हैं। अक्सर यह विपक्षी दलों या नेताओं पर तंज के रूप में इस्तेमाल होता है, जैसे किसी नेता के गिरने पर उसके अनुयायियों की असलियत सामने आना।
यह मुहावरा भारतीय राजनीति में काफी प्रचलित है और सोशल मीडिया पर मीम्स या जोक्स में इस्तेमाल होता है।
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