विदेशों में वन्देमातरम
वन्देमातरम द्विषष्टिः श्रृंखला
विदेशों में वंदे मातरम का गायन और प्रदर्शन भारतीय राष्ट्रवाद का वैश्विक प्रतीक रहा है, जो स्वतंत्रता संग्राम से लेकर हाल के वर्षों तक भारतीय प्रवासियों और मित्र राष्ट्रों द्वारा अपनाया गया। 2025 में इसके 150 वर्ष पूरे होने पर विश्वभर के भारतीय दूतावासों ने सामूहिक गायन आयोजित किए, जो सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं।ऐतिहासिक उदाहरण1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ट में तिरंगा फहराया, जिस पर "वंदे मातरम" लिखा था, जो विदेश में पहला प्रमुख राष्ट्रवादी प्रदर्शन था
लंदन के इंडिया हाउस में क्रांतिकारियों ने इसे सभाओं में गाया, जो विदेशी धरती पर स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र बना। दक्षिण अफ्रीका से यूरोप तक भारतीय देशभक्तों ने प्रदर्शनों में इसका उपयोग प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में किया।हालिया समारोह (2025)2025 में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर जर्मनी, लंदन, पेरिस, नेपाल, पेरू, चिली, अर्जेंटीना, कोलंबिया, दुबई, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मिशनों ने सामूहिक गायन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। जर्मनी के बर्लिन में दूतावास और टैगोर सेंटर ने पीएम मोदी के संदेश के साथ प्रवासी समुदाय द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
दक्षिण कोरिया की मंत्री जेवॉन किम ने IFFI 2025 में इसे गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।अफ्रीकी देशों में प्रदर्शनइथियोपिया में 2025 में स्थानीय गायकों ने पीएम मोदी के सम्मान में वंदे मातरम गाया, जो भारत-इथियोपिया सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है। इन घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति की पहुंच दिखाई।राष्ट्रवादी महत्वये प्रदर्शन वंदे मातरम को केवल गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र के संकल्प और आशा का प्रतीक बनाते हैं, जैसा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा।�उपयोगकर्ता के पूर्व लेखों की भांति, यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत करता है।
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