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शनिवार, 3 जनवरी 2026

उत्तर प्रदेश में शिक्षक कुत्ता-निगरानी पर? यह व्यवस्था की नहीं, सत्ता क़े विवेक की हार है!

 

संपादकीय
उत्तर प्रदेश में शिक्षक, कुत्ता-निगरानी पर?

 यह व्यवस्था की नहीं, विवेक की हार है!

उत्तर प्रदेश में यदि शिक्षक से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह आवारा कुत्तों की निगरानी करे, तो यह आदेश नहीं—मानसिक पतन का दस्तावेज़ है। यह प्रश्न कुत्तों का नहीं, सम्मान, प्राथमिकता और नैतिक विवेक का है। जिस समाज ने गुरु को प्रथम पूज्य कहा, उसी समाज में शिक्षक को आज हर विफल प्रशासनिक योजना का सबसे सस्ता औज़ार बना दिया गया है। कभी चुनाव, कभी सर्वे, कभी जनगणना—और अब कुत्ता-निगरानी। क्या शिक्षक की नियुक्ति इसलिए हुई थी कि वह पढ़ाने के बजाय हर विभाग की नाकामी ढोए?
यह मान लेना कि “शिक्षक तो कर ही लेगा” दरअसल तंत्र की नैतिक कायरता है। शिक्षक इसलिए चुना जाता है क्योंकि वह चुप रहता है, विरोध नहीं करता, अदालत नहीं जाता। उसकी शालीनता को उसकी कमजोरी बना दिया गया है। यह कमजोरी शिक्षक की नहीं, प्रशासनिक सोच की है।आवारा कुत्तों की समस्या वास्तविक है। इससे इनकार नहीं। लेकिन समाधान के लिए नगर निकाय, पशुपालन विभाग, स्थानीय प्रशासन और बजट मौजूद हैं। जब ये तंत्र निष्क्रिय हों और उनका बोझ शिक्षक पर डाल दिया जाए, तो यह समाधान नहीं—जिम्मेदारी से पलायन है।
यह विडंबना ही नहीं, विडंबना से आगे का सत्य है कि जो राज्य स्वयं को ज्ञान-आधारित भविष्य की ओर बढ़ता बताता है, वहाँ शिक्षक को शिक्षा से हटाकर निगरानी कर्म में लगाया जा रहा है। विश्वगुरु का सपना ऐसे नहीं बनता—यह वैचारिक दिवालियापन का संकेत है।
आज शिक्षक कुत्ते गिन रहा है, कल क्या? यही क्रम चलता रहा तो शिक्षक की गरिमा काग़ज़ों में रह जाएगी और शिक्षा मैदान में। जिस समाज में शिक्षक का अपमान सामान्य हो जाए, वहाँ बच्चों को ज्ञान नहीं, उपेक्षा का संस्कार मिलता है।
समाधान स्पष्ट है। शिक्षक की भूमिका सीमित और संरक्षित हो। गैर-शैक्षणिक कार्यों पर स्पष्ट, लिखित और बाध्यकारी रोक लगे। प्रशासनिक विफलताओं की जवाबदेही ऊपर तय हो—नीचे नहीं। उत्तर प्रदेश को कुत्तों की नहीं, व्यवस्था की निगरानी चाहिए। और यह
निगरानी शिक्षक से नहीं, प्रशासन से करवाई जानी चाहिए।
शिक्षक पढ़ाएगा तो समाज बनेगा। शिक्षक अपमानित होगा तो भविष्य टूटेगा।
यह संपादकीय किसी आदेश के विरुद्ध नहीं, एक खतरनाक मानसिकता के विरुद्ध चेतावनी है। 

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