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मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

युवा सहकार महा सम्मेलन, उत्तर प्रदेश: सहकारिता से समृद्धि—जहाँ सहकारिता, वहीं विकास

 

युवा सहकार महा सम्मेलन, उत्तर प्रदेश: सहकारिता से समृद्धि—जहाँ सहकारिता, वहीं विकास

जेपीएस राठौर,मंत्री सहकारिता




उत्तर प्रदेश में सहकारिता आंदोलन केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, ग्रामीण सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला रहा है। बदलते समय के साथ सहकारिता को नई ऊर्जा, नई सोच और युवा नेतृत्व की आवश्यकता थी। इसी आवश्यकता की पूर्ति का सशक्त माध्यम बनकर “युवा सहकार महा सम्मेलन, उत्तर प्रदेश” सामने आया है। यह सम्मेलन सहकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य—तीनों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है।

आज जब प्रदेश का नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में है और सहकारिता विभाग को सक्रिय, परिणामोन्मुखी दिशा देने का दायित्व सहकारिता मंत्री जी.पी.एस. राठौर निभा रहे हैं, तब यह सम्मेलन सहकारिता आंदोलन को मुख्यधारा में लाने की एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जाना चाहिए।

सहकारिता आंदोलन: भारतीय परंपरा और आधुनिक आवश्यकता

सहकारिता भारत की आत्मा में बसने वाला विचार है। “सबका साथ, सबका विकास” का भाव सहकारिता में स्वाभाविक रूप से समाहित है। ग्राम सभाओं से लेकर दुग्ध संघों, कृषि समितियों और सहकारी बैंकों तक—सहकारिता ने हमेशा आम जन को आर्थिक ताकत दी है।उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में सहकारिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यहाँ सहकारिता:

  • किसानों को सस्ता ऋण देती है
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देती है
  • छोटे व्यापारियों और स्वयं सहायता समूहों को संबल देती है
  • सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता का माध्यम बनती है

युवा सहकार महा सम्मेलन: नई पीढ़ी, नया संकल्प

युवा सहकार महा सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा शक्ति को सहकारिता से जोड़ने का आंदोलन है। आज का युवा तकनीक-सक्षम है, नवाचार में विश्वास रखता है और परिणाम चाहता है। यदि यही ऊर्जा सहकारिता से जुड़ जाए तो यह आंदोलन कई गुना सशक्त हो सकता है।इस सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. युवाओं को सहकारिता की मूल भावना से जोड़ना
  2. सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और प्रोफेशनलिज़्म लाना
  3. तकनीक और डिजिटल माध्यमों से सहकारिता को मजबूत करना
  4. सहकारी बैंकों और समितियों को आधुनिक आर्थिक प्रणाली से जोड़ना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: सहकारिता को शासन की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शासन का मूल मंत्र है—सुशासन, पारदर्शिता और विकास। सहकारिता को भी इसी दृष्टि से देखा गया है। योगी सरकार ने सहकारिता को केवल विभागीय ढांचे में सीमित न रखकर, इसे ग्रामीण विकास, कृषि सुधार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा।

योगी सरकार के कार्यकाल में:

  • सहकारी संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ी
  • भ्रष्टाचार और गुटबाजी पर प्रभावी नियंत्रण हुआ
  • किसानों और आम जमाकर्ताओं का विश्वास पुनः स्थापित हुआ
  • सहकारिता को विकास का साझेदार बनाया गया

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है—“सहकारिता केवल योजनाओं का माध्यम नहीं, बल्कि समृद्धि का रास्ता है।”सहकारिता मंत्री जी.पी.एस. राठौर की सशक्त और सक्रिय भूमिका

उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जी.पी.एस. राठौर ने अपने कार्यकाल में यह सिद्ध किया है कि सहकारिता को केवल फाइलों से निकालकर जमीन पर उतारा जा सकता है। उनकी कार्यशैली में तीन तत्व स्पष्ट दिखते हैं:संवेदनशीलता,सक्रियता,सुधार की प्रतिबद्धता

उन्होंने सहकारी बैंकों, समितियों और संघों के साथ संवाद बढ़ाया, जमीनी समस्याओं को समझा और व्यावहारिक समाधान दिए। युवा सहकार महा सम्मेलन इसी सक्रिय दृष्टिकोण का परिणाम है।राठौर जी का यह मानना है कि:

“जब तक सहकारिता में युवा नहीं आएंगे, तब तक सहकारिता में भविष्य नहीं आएगा।”

16 सहकारी बैंकों को उचित सम्मान और मुख्यधारा में लाकर खड़ा किया , सहकारिता मंत्री का अप्रतिम योगदानउत्तर प्रदेश के 16 सहकारी बैंक दशकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक इन्हें वह सम्मान और स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। निजी और राष्ट्रीयकृत बैंकों की चकाचौंध में सहकारी बैंक उपेक्षित होते गए।

आज आवश्यकता है कि:इन बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जाए,डिजिटल बैंकिंग, कोर बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाएँ लागू हों,इन्हें नीति निर्माण में भागीदार बनाया जाए,इनके कर्मचारियों और प्रबंधन को प्रशिक्षण और सम्मान मिले

योगी सरकार और सहकारिता मंत्री के प्रयासों से अब यह प्रक्रिया तेज हुई है। सहकारी बैंकों को पुनः मुख्यधारा की बैंकिंग व्यवस्था में लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सहकारिता और समृद्धि का अटूट संबंध

“जहाँ सहकारिता, वहीं विकास”—यह केवल नारा नहीं, बल्कि अनुभव से निकला सत्य है। जिन क्षेत्रों में सहकारी संस्थाएँ मजबूत हैं, वहाँ:किसान आत्मनिर्भर हैं,ग्रामीण पलायन कम है,स्थानीय रोजगार बढ़ा है,सामाजिक विश्वास मजबूत हुआ है,सहकारिता मुनाफे से अधिक मानव कल्याण पर केंद्रित होती है। यही कारण है कि यह मॉडल टिकाऊ विकास का सबसे प्रभावी माध्यम बनता है।

युवा, तकनीक और सहकारिता: भविष्य की दिशा

युवा सहकार महा सम्मेलन का सबसे बड़ा योगदान यह है कि यह सहकारिता को भविष्य से जोड़ता है। आज सहकारिता को:स्टार्टअप सोच,डिजिटल प्लेटफॉर्म,पारदर्शी प्रबंधन,नवाचार आधारित मॉडल की आवश्यकता है। युवा इसमें निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। जब युवा नेतृत्व सहकारिता से जुड़ेगा, तब यह आंदोलन केवल जीवित नहीं रहेगा, बल्कि नेतृत्व करेगा।

सहकारिता से समृद्ध उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में सहकारिता आंदोलन आज एक निर्णायक मोड़ पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मजबूत नेतृत्व, सहकारिता मंत्री जी.पी.एस. राठौर की सक्रियता, 16 सहकारी बैंकों को पुनः सम्मान दिलाने का संकल्प और युवा सहकार महा सम्मेलन जैसी पहल—ये सभी मिलकर एक नई सहकारी क्रांति की नींव रख रहे हैं।आज यह स्पष्ट है कि:सहकारिता ही ग्रामीण विकास का स्थायी मार्ग है,सहकारिता ही आर्थिक लोकतंत्र का सशक्त माध्यम है,सहकारिता ही समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की कुंजी हैजहाँ सहकारिता है, वहीं विकास है। जहाँ विकास है, वहीं समृद्धि है।

राजेंद्र नाथ तिवारी

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