वन्देमातरम पर उपनिवेशवादियों का कठोर प्रहार!(17) - कौटिल्य का भारत

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सोमवार, 24 नवंबर 2025

वन्देमातरम पर उपनिवेशवादियों का कठोर प्रहार!(17)

 

वन्देमातरम सप्तदस  17वीं श्रंखला


वन्देमातरम: राष्ट्रप्रेम की पुकार'वन्देमातरम' महज एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन का वह प्राण था, जिसने करोड़ों भारतीयों की भावना और चेतना को झकझोर दिया। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत अंग्रेजों के औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। ‘वन्दे मातरम्’ का अर्थ है – “मां, तुझे नमन”; जिसमें ‘मां’ से अभिप्रेत भारतभूमि है – वह धरती जो शस्य-श्यामला, जल-जनित, पर्वतीय और पूज्य है। यह गीत पहली बार 1905 में बंग-भंग आंदोलन के समय गूंजा और जल्द ही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का रणघोष बन गया। इसने राष्ट्रीयता, एकता और जागरूकता को नई ऊंचाई दी।उपनिवेशवादी दमन: सत्ता और अस्मिता का संघर्षब्रिटिश शासन का मुख्य आधार भारतीय प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों का शोषण था। औपनिवेशिक सत्ता ने भारतीय समाज में फूट डालने, संस्कृति को कमजोर करने और आर्थिक दासता गहराने के लिए अनेक रणनीतियाँ अपनाईं। किसान, मजदूर, दस्तकार, महिलाएं – सभी वर्ग दमन के शिकार बने। सिर्फ आर्थिक दोहन ही नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं, रीति-रिवाजों, समाज-संरचना और सामान्य जीवन मूल्यों को भी ब्रिटिश नीति-निर्माताओं ने तोड़ने का भरसक प्रयास किया। मैकाले की शिक्षा नीति से लेकर भारतीय प्रेस पर अंकुश तक, सबका उद्देश्य भारत की अस्मिता को मलिन करना था

प्रतिरोध और नवचेतना इसी औपनिवेशिक दमन के सापेक्ष 'वन्देमातरम' ने स्वाधीनता की चेतना का संचार किया। देशभर में जब लोग ब्रिटिश सत्ता की उत्पीड़नकारी नीतियों के आगे विवश थे, तभी 'वन्देमातरम' की आवाज़ ने उन्हें आत्मबल दिया। यह गीत सामूहिक एकजुटता, आत्मबलिदान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सूत्रधर बना। राष्ट्रवादियों ने इसे भविष्य के लिए एक आदर्श और प्रेरणा-स्त्रोत की तरह अपनाया।ब्रिटिश सरकार को जब अहसास हुआ कि 'वन्देमातरम' जनता को गोलबंद कर रहा है, तब उन्होंने इस गीत के सार्वजनिक गायन पर अंकुश लगाने की नीतियाँ बनाईं। मगर इससे इसकी लोकप्रियता और गहराई बढ़ती गई। स्कूलों, सभाओं, आंदोलनों, जेलों – हर जगह यह प्रतिरोध की आवाज़ बन चुका था। स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यह किसी संजीवनी और गायत्री मंत्र की तरह था, जो उन्हें वीरोचित आत्मबल और जन्मभूमि के लिए त्याग की प्रेरणा देता रहा।औपनिवेशिक अन्याय के विविध रूपब्रिटिश औपनिवेशिक नीति ने भारत में सामाजिक विषमता, जातिगत भेदभाव और श्रम के शोषण को बढ़ावा दिया। पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने में तोड़फोड़ कर स्थानीय समाज को कमजोर करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करना, और वन, जल, ज़मीन के अधिकार छीनना – औपनिवेशिक सत्ता के प्रमुख हथियार रहे। वस्त्र उद्योग, दस्तकारी, कुटीर उद्योग – इन सबका नाश कर लाखों भारतीयों को गरीबी, भुखमरी और बेकारी में धकेल दिया गया। यातनाएं, दबाव, फांसी, निर्वासन – उपनिवेशवादी न्याय प्रणाली ने असंतोष को कुचलने क़े लिए हर हथकंडाअपनाया।'वन्देमातरम' की ऐतिहासिक भूमिका'वन्देमातरम' के साथ भारत का स्वतंत्रता संग्राम और नवजागरण अभिन्न रूप से जुड़ा है। जितनी बार उपनिवेशवाद ने दमन की नीति अपनाई, उतनी ही बार गीत की गूंज और तीव्र होती गई। हिंसक आंदोलनों से लेकर असहयोग आंदोलन तथा सविनय अवज्ञा तक, हर स्तर पर यह गीत देशवासियों के लिए प्रेरणास्त्रोत और शक्ति-स्रोत बनता गया। भारतीय समाज का हर तबका – किसान, मजदूर, विद्यार्थी, महिलाएं, बुजुर्ग – सबने इसे अपनी आवाज़ बनाया और उसी ने आजादी की ज़मीन तैयार की।

'वन्देमातरम' ने न केवल औपनिवेशिक सत्ता के दमन का प्रतिरोध किया, बल्कि भारतीय समाज में आत्मसम्मान, स्वाभिमान और एकता का भाव पैदा किया। इस गीत की भावना आज भी भारत की राष्ट्रीय चेतना और संस्कृतिक मूल्यों में जीवित है। औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध यह महागान, आज भी प्रत्येक भारतीय को आह्वान करता है – “मां, तुझे नमन!”'अंग्रेजो, दलालों तत्कालीन सत्ता समर्थक राय बहादुरो ने जितना आंदोलन करियो  का दमन  किया, वन्देमातरम फुटबाल की गेंद की तरह उतना ही उछलता गया.🙏🙏

वन्देमातरम की अष्टांदश श्रृंखला कल :::🙏

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