क्या लौटेगी कुवानो की खोई धारा? जनसहभागिता से शुरू हुआ पुनर्जीवन अभियान" - कौटिल्य का भारत

Breaking News

Home Top Ad

विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9415671117

Post Top Ad

बुधवार, 3 जून 2026

क्या लौटेगी कुवानो की खोई धारा? जनसहभागिता से शुरू हुआ पुनर्जीवन अभियान"


जनसहभागिता से कुवानो नदी पुनर्जीवन अभियान का शुभारंभ

बस्ती, 03 जून।संवाददाता


 जिला प्रशासन के तत्वावधान में कुवानो नदी के जीर्णोद्धार एवं पुनर्जीवन अभियान के तहत बुधवार को विकास खण्ड बस्ती सदर की ग्राम पंचायत भूअर निरंजनपुर में पुलिस लाइन के पीछे स्थित बाबा की कुटिया के निकट नदी सफाई अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों ने श्रमदान कर नदी तट की साफ-सफाई की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि नदियाँ भारतीय संस्कृति और सभ्यता की जीवनरेखा हैं। जिस प्रकार शरीर में धमनियाँ रक्त का संचार करती हैं, उसी प्रकार नदियाँ प्रकृति और मानव जीवन को ऊर्जा प्रदान करती हैं। इतिहास साक्षी है कि विश्व की महान सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुई हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नदियाँ अपने मूल स्वरूप को खोती जा रही हैं। जलस्तर में गिरावट, प्रदूषण और अतिक्रमण गंभीर चुनौतियाँ बन चुकी हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह अपनी प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाए। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से कुवानो नदी पुनर्जीवन अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने का आह्वान किया।

अभियान में ग्राम प्रधान राम वचन, क्षेत्र पंचायत सदस्य राम अभिलाष चौहान, अशोक चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान किया। इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी (ग्राम्य विकास) राजनारायण शुक्ल, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सहजराम, ग्राम पंचायत अधिकारी रविशंकर शुक्ल, राम जनम, अनीस खान, राम सजीवन चौधरी, रईश खान, सतीश, विनय चौधरी, कपिल देव चौधरी तथा अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे।

कौटिल्य दृष्टि

कुवानो नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि बस्ती की सांस्कृतिक स्मृति और पर्यावरणीय विरासत है। वर्षों से उपेक्षा और प्रदूषण का दंश झेल रही इस नदी के पुनर्जीवन का प्रयास स्वागतयोग्य है। हालांकि प्रश्न यह भी है कि क्या केवल प्रतीकात्मक सफाई अभियान पर्याप्त होंगे, या फिर अतिक्रमण हटाने, सीवेज नियंत्रण और जल संरक्षण की ठोस एवं दीर्घकालिक नीति भी बनाई जाएगी? नदियों का पुनर्जन्म केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और निरंतर जनसहभागिता से ही संभव है। कुवानो बचेगी तो आने वाली पीढ़ियों का जल, पर्यावरण और इतिहास भी बचेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad