रामलला के चढ़ावे पर डाका! आस्था से विश्वासघात करने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं
अयोध्या। वी के त्रिपाठी, सम्वाददाता
रामलला के चरणों में श्रद्धालु अपनी कमाई का अंश यह विश्वास करके अर्पित करते हैं कि वह धर्म, सेवा और राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में लगेगा। यदि उसी पवित्र चढ़ावे में गबन या चोरी के आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो यह केवल धन की चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात है।
इसी भावना को व्यक्त करते हुए अयोध्या बार एसोसिएशन ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि इस मामले के आरोपियों की ओर से कोई अधिवक्ता पैरवी नहीं करेगा। इतना ही नहीं, यदि कोई सदस्य इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
सवाल केवल कानून का नहीं है, बल्कि नैतिकता का भी है। जो हाथ भगवान के चरणों में चढ़ाए गए दान तक पहुँचने का आरोप झेल रहे हैं, वे यदि दोषी सिद्ध होते हैं तो उन्होंने केवल मंदिर को नहीं, बल्कि पूरे समाज के विश्वास को चोट पहुँचाई है।
सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब पूरे देश की निगाह न्यायिक प्रक्रिया पर है। समाज की अपेक्षा है कि सच्चाई सामने आए और यदि आरोप सिद्ध हों तो ऐसी कठोर सजा मिले कि भविष्य में कोई भी धार्मिक आस्था और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
"रामलला के दरबार में चढ़ा दान किसी व्यक्ति की तिजोरी नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की अमानत है। उस अमानत पर यदि कोई हाथ डालता है और आरोप सिद्ध होते हैं, तो वह केवल अपराधी नहीं, समाज के विश्वास का भी दोषी है।"
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