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सोमवार, 8 जून 2026

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़, प्रशासन की घटती तैयारी

 भदेश्वरनाथ धाम में उमड़ रही आस्था की भीड़, व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर प्रश्न


बस्ती। अधिक मास (मलमास) के पावन अवसर पर भगवान शिव के जलाभिषेक हेतु प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा भदेश्वरनाथ धाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धा और आस्था का यह विराट प्रवाह जहां धार्मिक उत्साह का परिचायक है, वहीं भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर और मार्गों पर भीड़ इस हद तक बढ़ गई है कि जलाभिषेक की सुव्यवस्थित व्यवस्था लगभग समाप्त हो चुकी है। अनेक लोग लाइन में आगे बढ़ने के बजाय एक-दूसरे के ऊपर जल फेंककर ही अपनी पूजा पूर्ण मानने को विवश हैं। धक्का-मुक्की, अव्यवस्थित आवागमन और वाहनों के अनियंत्रित संचालन से श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जलाभिषेक करने पहुंचे स्वरूप राजभर ने बताया कि प्रतिदिन की यातायात और भीड़ व्यवस्था इतनी अव्यवस्थित है कि दर्शन के लिए आने वाला व्यक्ति संतोष के बजाय परेशानी लेकर लौटता है। उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रभावी भीड़ नियंत्रण, पार्किंग, बैरिकेडिंग तथा मार्गदर्शन की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती। मंदिर प्रशासन भी सीमित संसाधनों के कारण स्वयं को असहाय महसूस कर रहा है।

स्थिति यह है कि कोई श्रद्धालु किसी दिशा में जा रहा है तो कोई दूसरी दिशा में, जिससे अव्यवस्था लगातार बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने समुचित कदम नहीं उठाए तो किसी भी दिन भगदड़ अथवा अन्य अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।प्रश्न यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना की प्रतीक्षा कर रहा है? अक्सर देखा गया है कि अनहोनी होने के बाद पूरा तंत्र डैमेज कंट्रोल में जुट जाता है, जबकि वास्तविक आवश्यकता पूर्व तैयारी और प्रभावी प्रबंधन की है।

धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। आवश्यक है कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और मंदिर प्रबंधन संयुक्त रूप से बैरिकेडिंग, अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग, पर्याप्त पुलिस बल, पार्किंग व्यवस्था तथा भीड़ नियंत्रण की वैज्ञानिक योजना तत्काल लागू करें, ताकि आस्था का यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए कष्ट और जोखिम का कारण न बने। आस्था को व्यवस्था का सहारा चाहिए, क्योंकि दुर्घटना के बाद की सक्रियता से कहीं अधिक मूल्यवान दुर्घटना से पहले की सतर्कता होती है।

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