“नारद से न्यूज़ रूम तक: पत्रकारिता का धर्म और दायित्व” - कौटिल्य का भारत

Breaking News

Home Top Ad

विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9415671117

Post Top Ad

रविवार, 3 मई 2026

“नारद से न्यूज़ रूम तक: पत्रकारिता का धर्म और दायित्व”

  आदि पत्रकार नारद और विश्व पत्रकारिता दिवस: सत्य की वाणी, साहस की कलम


वी के त्रिपाठी, संवाददाता 

जब भी संवाद, सूचना और जनजागरण की बात होती है, भारतीय परंपरा में एक नाम सहज ही स्मरण में आता है—देवर्षि नारद। उन्हें अक्सर लोक कथाओं में केवल “उपद्रवकारी” या “कलह-प्रिय” के रूप में सीमित कर दिया जाता है, जबकि गहराई से देखें तो वे आदि पत्रकार हैं—पहले ऐसे संवाद वाहक, जिन्होंने देव, दानव और मानव—तीनों लोकों के बीच सूचना का सेतु बनाया।

आज विश्व पत्रकारिता दिवस के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि धर्म—कर्तव्य—और साहस का समन्वय मानकर देखें देवर्षि नारद का कार्य केवल संदेश पहुंचाना नहीं था।वे सूचना के वाहक थे, सत्य के उद्घाटक थे और समय के संवेदन शील विश्लेषक थे,वे किसी सत्ता के पक्ष में नहीं, सत्य के पक्ष में खड़े होते थे। उनकी वाणी में साहस था, उनकी दृष्टि में गहराई थी, और उनके संवाद में उद्देश्य था।आज की भाषा में कहें तो—वे “ब्रेकिंग न्यूज़” नहीं, “जागरण” करते थेवे “वायरल” नहीं, “विवेक” पैदा करते थे

 पत्रकारिता: सूचना नहीं, जिम्मेदारी है आज पत्रकारिता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ उसे तय करना है, क्या वह केवल खबर देगी? या समाज को दिशा भी देगी? पत्रकार का काम केवल यह बताना नहीं कि “क्या हुआ”,बल्कि यह भी है कि “क्यों हुआ?” “किसके लिए हुआ?” “और इसका परिणाम क्या होगा?”यदि पत्रकारिता केवल सूचना तक सीमित रह जाए,तो वह अधूरी है। जब वह सत्य + विश्लेषण + साहस का संगम बनती है,तभी वह पूर्ण होती है।

 आधुनिक पत्रकारिता की चुनौती-आज का दौर “सूचना विस्फोट” का है—लेकिन इसके साथ ही “सत्य का संकट” भी उतना ही बड़ा है।फेक न्यूज़, प्रोपेगैंडा, टीआरपी की दौड़ सत्ता/कॉरपोरेट का दबाव इन सबके बीच सच्ची पत्रकारिता कहीं दबती दिखाई देती है। ऐसे समय में नारद का आदर्श और भी प्रासंगिक हो जाता है—

निडर संवाद, निष्पक्ष दृष्टि और लोकहित का संकल्प। पत्रकार: कलम का योद्धा,पत्रकार केवल लेखक नहीं होता,वह समाज का चेतन प्रहरी होता है।उसकी कलम- अन्याय के खिलाफ हथियार है सत्य का प्रकाश है और जनमानस की आवाज हैजब वह सच लिखता है,तो केवल शब्द नहीं लिखता-इतिहास लिखता है। नारद से सीख: 3 मूल मंत्र1. निडरता ,सत्ता से नहीं, सत्य से जुड़ो. निष्पक्षता ,पक्ष नहीं, तथ्य चुने, लोकहित हर खबर का अंतिम लक्ष्य—जनकल्याण,आज की पुकारआज आवश्यकता है-ऐसी पत्रकारिता की, जो बिके नहीं, जो झुके नहीं,जो डरे नहीं,ऐसी पत्रकारिता, जो-समाज को केवल सूचना नहीं, चेतना दे।“जब पत्रकारिता सत्य से भटकती है,तो समाज अंधकार में चला जाता है।और जब पत्रकारिता सत्य के साथ खड़ी होती है,तो वही समाज प्रकाश की ओर बढ़ता है।”देवर्षि नारद की परंपरा हमें यह सिखाती है-कि संवाद केवल शब्दों का आदान-प्रदान नहीं,बल्कि सत्य का संचार है।

वंदे पत्रकारिता🙏

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad