अयोध्या: संस्कार कहीं छूट न जाएँ, सुरक्षा ही सब कुछ न बन जाए
बस्ती,वशिष्ठनगर से
अयोध्या आज एक नए दौर से गुजर रही है। भव्यता, विकास, वैश्विक पहचान—सब कुछ तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसी चमक के बीच एक प्रश्न गूंज रहा है—क्या इस परिवर्तन में संस्कार पीछे छूटते जा रहे हैं और केवल सुरक्षा ही शेष रह गई है?
सुरक्षा की अनिवार्यता#इसमें कोई संदेह नहीं कि अयोध्या जैसे संवेदनशील और आस्था-केन्द्रित नगर में सुरक्षा सर्वोपरि है।लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय ध्यान, और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि—ये सभी कारण इसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में बदलते हैं।सुरक्षा यहाँ केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा है। इसलिए बैरिकेड, जांच, निगरानी—ये सब आवश्यक हैं और इनका होना समय की मांग भी है।
संस्कार: अयोध्या की आत्मा#लेकिन अयोध्या केवल सुरक्षा चौकियों का शहर नहीं है।यह वह भूमि है जहाँ मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श जीवित है जहाँ विनम्रता, सेवा, त्याग और अनुशासन जीवन का हिस्सा रहे हैं
यदि शहर में आने वाला श्रद्धालु केवल जांच, रोक-टोक और कठोरता ही अनुभव करे, और उसे उस आत्मीयता, उस “रामत्व” का स्पर्श न मिले—तो अयोध्या की मूल आत्मा कहीं कमजोर पड़ जाती है।समस्या कहाँ है?समस्या सुरक्षा में नहीं है, बल्कि संतुलन के अभाव में है।जब व्यवस्था इतनी कठोर हो जाए कि नागरिक खुद को असहज महसूस करें ,श्रद्धालु भय और असुविधा के बीच दर्शन करें और स्थानीय जीवन बाधित हो जाए तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हम अयोध्या को केवल “सुरक्षा क्षेत्र” बनाकर उसकी सांस्कृतिक पहचान को सीमित कर रहे हैं?
समाधान: संतुलन ही मार्ग है अयोध्या को न तो केवल सुरक्षा का किला बनना है, और न ही पूरी तरह निर्बाध खुला क्षेत्र।उसे बनना है एक ऐसा आदर्श, जहाँ— सुरक्षा मजबूत हो, लेकिन व्यवहार मधुर हो,नियम सख्त हों, लेकिन व्यवस्था सहज हो, निगरानी सतर्क हो, लेकिन वातावरण स्वागत पूर्ण हो।
अयोध्या की पहचान उसके मंदिरों से पहले उसके संस्कारों से रही है।यदि सुरक्षा के नाम पर वे संस्कार पीछे छूट गए, तो विकास अधूरा रह जाएगा।इसलिए आवश्यकता है कि हम यह सुनिश्चित करें—“अयोध्या में सुरक्षा रहे, पर संस्कार कभी न जाएँ।” यही संतुलन रामनगरी को सच में “जगतगुरु” की दिशा में आगे बढ़ाएगा।अन्यथा अयोध्या तीर्थ क्षेत्र,पर्यटक क्षेत्र के बजाय सख्त पहरे की नगरी ही रह जाएगी।ईश्वर के यहां वी आई पी कौन?
राजेंद्र नाथ तिवारी,कौटिल्य का भारत
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