“कप्तानगंज पुलिस कटघरे में: नाबालिग को माँ नहीं, आरोपी के हवाले किया, CWC ने मांगा जवाब”
बस्ती। वीरकुमार त्रिपाठी, मण्डल संवाददाता, कौटिल्य का भारत 25मार्च 26,समय 3.25
जनपद की पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कप्तानगंज थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा एक नाबालिग बालिका को उसकी माँ को सौंपने के बजाय कथित आरोपी के साथ भेज देने का मामला सामने आया है। मामले की शिकायत मिलने पर बाल कल्याण समिति (CWC) ने इसे गंभीरता से लेते हुए थानाध्यक्ष कप्तानगंज और मामले के विवेचक को न्यायपीठ के समक्ष स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार कप्तानगंज थाना क्षेत्र के एक गांव की निवासी महिला ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उसकी नाबालिग बेटी 7 फरवरी को कॉपी-किताब खरीदने के लिए बाजार जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। इसके बाद 8 फरवरी को पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर बालिका की तलाश शुरू की।
बताया जाता है कि 22 फरवरी को बालिका के थाने पर आने की सूचना उसकी माँ को मिली। जब वह थाने पहुंची तो पता चला कि बालिका ने किसी युवक से शादी कर ली है। इस बात से नाराज माँ ने बेटी को अपने साथ घर ले जाने से इंकार कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में न तो काउंसलिंग कराई और न ही बालिका को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया, बल्कि कथित आरोपी से सांठगांठ करते हुए बालिका को उसी के साथ भेज दिया।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब इसकी जानकारी चाइल्ड लाइन को हुई। बालिका की माँ ने पहले ही चाइल्ड लाइन के हेल्पलाइन नंबर 1098 पर बेटी के गायब होने की सूचना दे रखी थी। चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ताओं ने जब महिला से संपर्क किया तो उसने बताया कि पुलिस ने बालिका को बरामद करने के बाद आरोपी के साथ ही भेज दिया है।
शिकायत के अनुसार बाद में पुलिस ने 25 फरवरी को महिला को थाने बुलाकर कहा कि बेटी को बस्ती लेकर चलना है और यदि वह बेटी को अपने साथ नहीं ले जाएगी तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया जाएगा। महिला ने न्यायपीठ के समक्ष दिए गए अपने लिखित प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 22 फरवरी से 25 फरवरी तक उसकी नाबालिग बेटी को पुलिस ने कथित अपहरण के आरोपी के घर पर ही रहने दिया। इतना ही नहीं, उसका मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उसे अब तक एफआईआर की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
मामले की शिकायत मिलने के बाद बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव और मंजू त्रिपाठी की टीम ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए थानाध्यक्ष कप्तानगंज और विवेचक से स्पष्टीकरण तलब किया है।
इस संबंध में पूछे जाने पर अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में बालिका और परिजनों के बीच तनाव की स्थिति बन जाती है, लेकिन काउंसलिंग के बाद समाधान निकल आता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में पुलिस को नाबालिग बालिका को आरोपी के साथ नहीं भेजना चाहिए था। यह पूरी तरह गलत और नियमों के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि यदि संबंधित पुलिस अधिकारियों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी.

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