दिल्ली, समाचार 25मार्च 26,समय 2.00
कभी जिंदगी से भरे सपनों के साथ इंजीनियर बनने निकले हरीश राणा की जीवन यात्रा मंगलवार को एक गहरे सन्नाटे में थम गई। 13 वर्षों तक कोमा में रहने के बाद उन्होंने आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज सुबह उनका अंतिम संस्कार साउथ दिल्ली के ग्रीन पार्क क्षेत्र में संपन्न कर दिया गया।
हरीश राणा, जिनकी आँखों में कभी भविष्य के उज्ज्वल सपने थे, एक लंबी और कठिन चिकित्सा अवस्था से गुजर रहे थे। पिछले 13 वर्षों से वे कोमा में थे—एक ऐसी स्थिति, जिसमें जीवन तो था, पर संवाद नहीं; साँसें थीं, पर एहसासों का कोई प्रत्युत्तर नहीं।
उनके निधन की सूचना जैसे ही उनके पिता अशोक राणा ने सोसाइटी के व्हाट्सऐप समूह में साझा की, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अपने संदेश में उन्होंने लिखा—
“सुबह 9 बजे पार्थिव शरीर (हरीश राणा जी) का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क, साउथ दिल्ली में किया जाएगा… ॐ शांति ॐ…”
यह संदेश पढ़ते ही लोगों की आँखें नम हो गईं। वर्षों से हरीश के संघर्ष को देख रहे पड़ोसी और परिचित भावुक हो उठे। यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि एक ऐसे सपने का अंत था, जो कभी पूरे जोश और उम्मीद के साथ शुरू हुआ था।
हरीश राणा की कहानी उन अनगिनत परिवारों के दर्द को भी उजागर करती है, जो लंबे समय तक किसी अपने को ऐसी अवस्था में देख रहे होते हैं, जहाँ आशा और असहायता साथ-साथ चलती हैं।
उनकी विदाई ने एक बार फिर यह प्रश्न छोड़ दिया है—जीवन की अनिश्चितता और संघर्ष के बीच इंसान की असली ताकत क्या है? शायद उत्तर है—परिवार का धैर्य, प्रेम और अंतहीन प्रतीक्षा।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को इस कठिन समय में संबल दे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें