आरटीआई की लड़ाई रंग लाई — सूचना आयुक्त ने 20 से अधिक अधिकारियों पर ठोका ₹25-₹25 हजार का जुर्माना
सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी की पहल पर बड़ी कार्रवाई, कई नगर निकायों और विभागों के अधिकारियों पर अर्थदंड
बस्ती/सिद्धार्थनगर।
सूचना के अधिकार की लड़ाई लड़ रहे आरटीआई कार्यकर्ता सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी की लगातार कोशिशों का बड़ा परिणाम सामने आया है। राज्य सूचना आयोग में दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने कई विभागों के जन सूचना अधिकारियों और प्रथम अपील अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए ₹25-₹25 हजार का अर्थदंड लगाने का आदेश दिया है।
बताया जा रहा है कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। बार-बार आवेदन और अपील के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा सूचना देने में लापरवाही और टालमटोल की गई।
इसी के खिलाफ आरटीआई कार्यकर्ता सुदृष्टि नारायण त्रिपाठी ने राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की। मामले की सुनवाई के बाद सूचना आयुक्त ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कई अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगा दिया।
कार्रवाई की जद में आए विभागों में नगर पालिका परिषद बस्ती, नगर पंचायत बभनान, नगर पंचायत शोहरतगढ़, नगर पालिका परिषद बांसी, नगर पंचायत कप्तानगंज, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर, नगर पालिका परिषद खलीलाबाद, नगर पंचायत बड़हलगंज, नगर पंचायत नौतनवा, नगर पंचायत परतावल, विकास खंड परशुरामपुर, विकास खंड बनकटी, विकास खंड साल्टा/साल्टा क्षेत्र, डीपीआरओ बस्ती, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी बस्ती, नगर पालिका परिषद बदायूं, दातागंज सहित कई अन्य अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन सभी अधिकारियों पर ₹25-₹25 हजार के हिसाब से लगाए गए दंड की कुल राशि लगभग 20 लाख रुपये के आसपास पहुंच रही है। यह कार्रवाई सूचना के अधिकार कानून की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के लिए बड़ा संदेश मानी जा रही है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला बताता है कि अगर नागरिक सजग होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ें तो प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेह बनाया जा सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है —क्या इस कार्रवाई के बाद अधिकारी सूचना अधिकार कानून का सम्मान करेंगे या फिर जनता को अपने अधिकार के लिए इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा?

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