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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

कोर्ट के आदेश पर भी घूस का पहरा — विक्रमजोत सीएचसी में 45 हजार की रिश्वत का आरोप


“रिश्वत दो, तभी मिलेगा हक” — बस्ती के विक्रमजोत सीएचसी में घूसखोरी का सनसनीखेज वीडियो वायरल

बस्ती,


कोर्ट के आदेश के बाद भी एरियर भुगतान के लिए 45 हजार रुपये की मांग, बाबू का रिश्वत लेते वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहा

 उत्तर प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा कर रही हो, लेकिन बस्ती जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दावों की खुलेआम धज्जियां उड़ाता दिखाई दे रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत में तैनात एक बाबू का कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

वायरल वीडियो में सीएचसी विक्रमजोत के बाबू प्रदीप श्रीवास्तव को पैसे लेते हुए देखा जा रहा है। आरोप है कि एरियर भुगतान के लिए पीड़िता सुनीता वर्मा से 45 हजार रुपये की मांग की गई थी। पीड़िता के भाई ने बाबू को पैसे लेते हुए वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

पीड़िता सुनीता वर्मा के अनुसार, उन्होंने अपने एरियर भुगतान के लिए न्यायालय का सहारा लिया था। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग को चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन विभागीय कर्मचारियों ने आदेश का पालन करने के बजाय रिश्वत की मांग शुरू कर दी।सुनीता वर्मा का कहना है कि बिना पैसे दिए उनकी फाइल आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया गया। मजबूर होकर उन्हें रिश्वत देनी पड़ी, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बस्ती का स्वास्थ्य महकमा “सेवा का केंद्र” नहीं बल्कि “लूट का अड्डा” बन चुका है, जहां अपने ही कर्मचारियों को उनका हक पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है।

जब इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कार्रवाई की बात करने के बजाय अपने कर्मचारी का बचाव करते हुए नजर आए। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि क्या इस भ्रष्टाचार में विभाग के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो स्वास्थ्य विभाग के कई और घोटाले सामने आ सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल अब यह है—क्या बस्ती का स्वास्थ्य विभाग अदालत के आदेशों को भी रिश्वत के तराजू पर तौल रहा है?

और क्या प्रशासन इस वायरल वीडियो पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?


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