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रविवार, 15 मार्च 2026

“पवित्रता के साये में पाप का धंधा? बस्ती के चर्च में ‘पादरी-परिवार’ पर गांजा कारोबार और संपत्ति खेल के आरोप”


क्या ‘पादरी’ और ‘बेटी’ गांजा भी बेच सकते हैं?

बस्ती के चर्च में संपत्ति, सत्ता और साज़िश का सनसनीखेज खेल

वी के त्रिपाठी

बस्ती।


धर्म, सेवा और नैतिकता का संदेश देने वाले गिरजाघर में यदि संपत्ति के खेल, सत्ता की साजिश और अवैध गतिविधियों के आरोप गूंजने लगें तो सवाल उठना स्वाभाविक है। बस्ती के एक चर्च को लेकर इन दिनों कुछ ऐसे ही गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं, जिनसे पूरे इलाके में हलचल मच गई है। चर्च से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि चर्च की संपत्ति और उसके आर्थिक प्रबंधन को लेकर अंदरखाने एक बड़ा संघर्ष चल रहा है। आरोपों के केंद्र में चर्च से जुड़े अनिल लाल बताए जा रहे हैं, जिन पर चर्च की संपत्ति को निजी हित में इस्तेमाल करने और उसे बेचने की साजिश रचने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

विरोध करने वाले पादरी को हटाया गया? बताया जा रहा है कि पूर्व पादरी रेमंड स्टर्लिंग ने जब चर्च की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल उठाए, तो उनके खिलाफ माहौल बना दिया गया। चर्च के अंदरूनी लोगों का कहना है कि स्टर्लिंग को हटाने के लिए बाकायदा रणनीति बनाई गई और धीरे-धीरे उन्हें पद से अलग कर दिया गया।

स्टर्लिंग का आरोप है कि चर्च की संपत्ति को “व्यवस्था” के नाम पर बेचा या स्थानांतरित करने की कोशिश हो रही थी, जिसका उन्होंने विरोध किया।गंभीर आरोपों से मचा हड़कंप, विवाद उस समय और गहरा गया जब कुछ लोगों ने यह सनसनीखेज आरोप लगाया कि पादरी और उनके परिवार पर गांजा बेचने तक के आरोप लगाए गए। यह आरोप कितने सही हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इन आरोपों ने चर्च के अंदरूनी संघर्ष को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

चर्च के अंदर सत्ता संघर्ष:स्थानीय लोगों का कहना है कि यह विवाद केवल धार्मिक व्यवस्था का नहीं बल्कि चर्च की करोड़ों की संपत्ति पर नियंत्रण का है। आरोप है कि कुछ लोग चर्च के संसाधनों पर कब्जा कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।सूत्र बताते हैं कि चर्च के भीतर दो गुट बन गए हैं—एक गुट अनिल लाल के साथ खड़ा है, जबकि दूसरा गुट पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल?इस पूरे मामले में प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

समाज में उठ रहा बड़ा सवाल?धार्मिक संस्थाएं समाज को नैतिकता और अनुशासन का संदेश देती हैं। ऐसे में यदि उन्हीं संस्थाओं के भीतर संपत्ति विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और अवैध गतिविधियों की चर्चा होने लगे, तो इससे समाज का भरोसा कमजोर होता है।लोगों की मांग है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच सामने आ सके और धार्मिक संस्था की गरिमा बनी रहे।


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