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शुक्रवार, 27 मार्च 2026

विभागीय मिलीभगत से पॉलीहाउस योजना में 42 लाख का खेल! किसान से रकम लेकर गायब हुई फर्म, तीन साल से कार्रवाई ठंडे बस्ते में

 पॉलीहाउस योजना में 42 लाख का खेल! किसान से पैसा लेकर गायब हुई फर्म, उद्यान विभाग पर मिलीभगत के आरोप 

बस्ती।कदाचारऔर प्लायन, मनोज यादव, संवादाता कोटील्यभारत 27मार्च 26,समय 11.15

 





किसानों की आय दोगुनी करने के नाम पर चलाई जा रही सरकारी योजनाओं में बड़े घोटाले की बू आने लगी है। बस्ती जनपद के कप्तानगंज विकास खंड के बढ़नी गांव निवासी किसान आलोक रंजन वर्मा ने आरोप लगाया है कि पॉलीहाउस योजना के नाम पर उससे 42 लाख रुपये वसूल लिए गए, लेकिन तीन साल बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।किसान का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने में लगे हैं, जिससे पूरे प्रकरण में फर्म और उद्यान विभाग की मिलीभगत की आशंका गहरा गई है।

58 लाख की परियोजना, 42 लाख किसान से वसूले,किसान आलोक रंजन वर्मा (मो. 9450000375) के अनुसार वर्ष 2023 में उन्हें एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत 4000 वर्ग मीटर में हाईटेक पॉलीहाउस स्थापित करने के लिए चयनित किया गया था।परियोजना की कुल लागत लगभग 58 लाख रुपये बताई गई थी, जिसमें 50 प्रतिशत सरकारी अनुदान का आश्वासन दिया गया था।आरोप है कि उद्यान विभाग ने नैतिक एग्री नामक फर्म को निर्माण का कार्य दिया। फर्म ने बैंक के माध्यम से अलग-अलग किस्तों में किसान से करीब 42 लाख रुपये वसूल लिए, लेकिन पॉलीहाउस का निर्माण अधूरा छोड़ दिया।

पैसा लेने के बाद गायब हुई फर्म,किसान का कहना है कि अब फर्म के प्रतिनिधि फोन तक नहीं उठा रहे हैं और साइट पर भी कोई काम नहीं हो रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम वसूलने के बाद भी विभाग ने फर्म पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?

तीन साल से दर-दर भटक रहा किसान,आलोक रंजन वर्मा का कहना है कि उन्होंने कई बार जिला उद्यान अधिकारी और मंडलीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन तीन साल में भी न जांच पूरी हुई और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई।इससे नाराज किसान अब इसे सरकारी योजना के नाम पर संगठित खेल बता रहा है।

किसान पर दोहरी मार,पॉलीहाउस में जरबेरा फूल की खेती शुरू करने के लिए किसान पहले ही भारी निवेश कर चुका है।खेत में गोबर की खाद डाली गईलगभग 50 क्विंटल नीम खली डाली गई,अन्य पोषक तत्वों पर भी खर्च हुआ,लेकिन पॉलीहाउस अधूरा होने से खेती शुरू नहीं हो पाई और खेत में खरपतवार उग आए, जिससे नुकसान और बढ़ गया।किसान का कहना है कि जब तक फर्म द्वारा कार्य पूर्ण कर आधिकारिक रसीद नहीं दी जाएगी, तब तक सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी भी जारी नहीं होगी। इससे उसकी पूरी पूंजी फंस गई है।

न्याय नहीं मिला तो होगा बड़ा आंदोलन,पीड़ित किसान आलोक रंजन वर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और केंद्र सरकार तक शिकायत दर्ज कराएंगे तथा जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

बड़ा सवाल,सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं चला रही है, लेकिन यदि उन्हीं योजनाओं में किसानों से लाखों रुपये लेकर फर्म गायब हो जाए और विभाग मौन रहे, तो आखिर किसान किस पर भरोसा करे?क्या बस्ती में पॉलीहाउस योजना के नाम पर किसानों के साथ बड़ा खेल चल रहा है?अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है।

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