हरदिया गांव में पानी की टंकी का मामला: फाइलों में खर्च करोड़ों, स्थल पर नहीं दिखी संरचना
बस्ती। जनपद बस्ती के सदर ब्लॉक अंतर्गत हरदिया गांव में पेयजल योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो पानी की नियमित आपूर्ति हो रही है और न ही निर्माण कार्य का स्पष्ट भौतिक प्रमाण दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में लगे नलों से पानी नहीं आता और कई स्थानों पर पाइपलाइन एवं फिटिंग कार्य अधूरा या त्रुटिपूर्ण स्थिति में है। ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल सुविधा के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं, जबकि वास्तविक लाभ लोगों तक नहीं पहुंचा।
दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2015-16 में निर्मल योजना के अंतर्गत लगभग सवा दो करोड़ रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2019-20 में उसी स्थान पर पुनः खर्च दर्शाते हुए दूसरी संरचना से संबंधित कार्य दर्ज किया गया। हालांकि मौके पर वर्तमान में कोई टंकी दिखाई नहीं देती, जिससे ग्रामीणों में असंतोष और संदेह की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में निर्मित संरचना क्षतिग्रस्त होने के बाद उसे हटाया गया, परन्तु नई व्यवस्था स्थापित नहीं की गई। इसके कारण पेयजल संकट यथावत बना हुआ है और लोगों को पानी के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस संबंध में जब उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिशासी अभियंता योगेंद्र प्रसाद से जानकारी ली गई तो उन्होंने तत्काल टिप्पणी करने से इंकार करते हुए बाद में जानकारी देने की बात कही।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच यह मामला पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी प्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने तथा पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें