रहस्यपूर्ण आग: विकास भवन बस्ती की दूसरी मंज़िल पर फाइलें खाक, सवालों के घेरे में मत्स्यपालक विकास अभिकरण
विश्व नाथ पाण्डेय/बस्ती।
विकास भवन बस्ती की दूसरी मंज़िल पर स्थित मत्स्यपालक विकास अभिकरण कार्यालय में द्वितीय शनिवार सुबह लगभग 9 बजे हल्का धुँआ उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते धुँआ तेज़ लपटों में बदल गया। सूचना मिलते ही 112 पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुँची और समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।लेकिन इस घटना ने कई गंभीर और रहस्यपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
-केवल एकही आलमारी क्यों?-कार्यालय में कुल आठ आलमारियाँ रखी थीं, जिनमें वर्षों के महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित बताए जाते हैं। आग की चपेट में केवल एक ही आलमारी आई, जिसमें रखी कई महत्वपूर्ण फाइलें जलकर खाक हो गईं।यहीं से सवाल उठता है—क्या यह महज दुर्घटना थी?या फिर चयनित तरीके से किसी खास आलमारी को निशाना बनाया गया?आखिर बाकी सात आलमारियाँ पूरी तरह सुरक्षित कैसे रहीं?
-कैसी थी फाइले-अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जली हुई फाइलें किस अवधि की थीं और उनमें किन योजनाओं, भुगतान या स्वीकृतियों से जुड़े दस्तावेज थे। सूत्रों की मानें तो ये फाइलें मत्स्य पालन योजनाओं, अनुदान वितरण और लाभार्थियों से संबंधित हो सकती हैं।
शॉर्ट सर्किट या साजिश? -प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन जिस तरह से एक ही आलमारी प्रभावित हुई, उसने इस दलील को कमजोर कर दिया है।दमकल विभाग की रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।
- जांच की मांगघटना के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएँ हैं। कई लोग इसे रिकॉर्ड नष्ट करने की साजिश मान रहे हैं।अब मांग उठ रही है कि—आग लगने के कारणों की उच्चस्तरीय जांच होयह स्पष्ट किया जाए कि फाइलें संयोग से जलीं या जानबूझकर जलाई गईंऔर यदि साजिश है तो जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की पहचान की जाए
-सबसे बड़ा सवाल-विकास भवन जैसे संवेदनशील परिसर में, वह भी कार्यालय समय के आसपास, ऐसी रहस्यमयी आग—संयोग या सुनियोजित?सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह आग सिर्फ फाइलें नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल जला गई है।

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