उत्तर प्रदेश की राजनीति जातीय वैमनस्यता के जाल में जकड़ी हुई है, जहाँ सत्तालोलुप नेता प्रजा को जाति-खेमों में बाँटकर अपना वोट-ठेका हथियाते हैं, जबकि राष्ट्रवाद का स्वर तोड़ने वाला नहीं, जोड़ने वाला होना चाहिए। यह व्यापक राष्ट्रवादी विवेचना जातीय कारोबारियों को आईना दिखाती है—जाति का जहर फैलाकर राष्ट्र को कमजोर करने वालों को अब जनता का जवाब मिलना चाहिए।जातीय साजिश का काला चेहरा ब्राह्मण-ठाकुर-ओबीसी-दलित के नाम पर साजिशें रचने वाले ये राजनीतिक माफिया परिवारों को तोड़ रहे हैं, समाज को खंडित कर रहे हैं और विकास को कुचल रहे हैं—यह राष्ट्रद्रोह के समान है!
हाईकोर्ट की रोक के बावजूद जातीय रैलियाँ, गोपनीय बैठकें और वोट-बाजार चला रहे ये ठेकेदार लोकतंत्र को बाजार बना चुके हैं।राष्ट्रविरोधी खेल उजागर विकास का कत्ल: जाति-वोट से सड़कें टूटीं, अस्पताल खाली, नौकरियाँ लुट गईं—ये नेता राष्ट्रहित को बलि चढ़ा रहे हैं।सामाजिक जहरबो रहे,अविश्वास, हिंसा, भाईचारे का अंत—यह जिन्ना की नीति का दोहराव है, जिसे योगी सरकार कुचल रही है।राष्ट्रवादी हमला जरूरी होगया हे,जागो भारत!संघर्ष का आह्वानकरो समान नागरिकता का झंडा उठाओ, आरक्षण को न्याय बनाओ न कि बदले की हथियार—जातिवादी दलों को वोट न दो, राष्ट्र को मजबूत करो!
योगी मॉडल अपनाओ: रन फॉर यूनिटी जैसी पहलें से एकजुट हो, जातीय माफियाओं को ठहराओ। सरदार पटेल की तरह एकात्मता लाओ।दलों पर सीधी चोटसपा, बसपा, कांग्रेस के जातीय कारोबारी—तुम्हारी सोशल इंजीनियरिंग राष्ट्र-विखंडन है! राष्ट्रवादी कोर को कमजोर करने वाले भी उतने ही दोषी। जनता अब जागेगी, 2027 में जाति-ठेकेदारों का हिसाब होगा।
बुद्धिजीवी, मीडिया: चुप्पी तोड़ो! “राष्ट्र पहले, जाति कूड़ेदान में” का नारा बुलंद करो।अंतिम चेतावनीउत्तर प्रदेश के जातीय वैमनस्य फैलाने वालों सुन लो—राष्ट्रवाद की लहर तुम्हें बहा ले जाएगी। कौटिल्य नीति याद रखो: शत्रु को अर्थ से हराओ, लेकिन आंतरिक शत्रुओं को जड़ से उखाड़ो। जागो भारत, एक हो जाओ—वैमनस्य मिटाओ!उठो!, खड़े हो!लक्ष्य का संधान करो आधुनिक अर्जुन!

सार्थक
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