कफ सिरप काण्ड जांच में खानापूर्ति करने वाले जिम्मेदार
कफ सिरप काण्ड जांच में खानापूर्ति करने वाले जिम्मेदार
जौनपुर। जनपद में कोडीन कफ सिरप तस्करी के प्रकरण में नित्य नए खुलासों ने दवा बाजार में खलबली मचा दी है। इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए नगर के दवा व्यवसायियों ने जहांगीराबाद स्थित दवा मंडी में एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर चल रहे इस अवैध कारोबार की कड़े शब्दों में निंदा की गई और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाई गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र कुमार ने कहा... बोगस लाइसेंस के जरिए देश-विदेश तक फैला यह काला कारोबार दवा व्यवसाय की गरिमा पर कलंक है।लेकिन इसके लिए सिर्फ दवा व्यवसायी ही जिम्मेदार नहीं हैं। दवा निर्माता कंपनियां, लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी और पिछले 10 वर्षों से जांच के नाम पर खानापूर्ति करने वाले अधिकारी भी बराबर के भागीदार हैं। उन्होंने मांग की कि जांच का दायरा बढ़ाया जाए और उन डिपो इंचार्ज, सेल्स टीम व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो, जिन्होंने पूर्व में इन बोगस फर्मों को श्क्लीन चिटश् दी या पुराने लाइसेंस निरस्त कर नए जारी किए।संगठन के महामंत्री राजेंद्र निगम ने जांच के नाम पर आम दवा व्यवसायियों के शोषण पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों में बुलाकर व्यवसायियों को हतोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि फर्जी लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी तो जांच से बाहर हैं, लेकिन अनुभव प्रमाण पत्र देने वाले व्यापारियों को पूछताछ के नाम पर परेशान किया जा रहा है, जो सरासर अनुचित है। दवा व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि वे अवैध कारोबार के खिलाफ हैं, लेकिन जांच के नाम पर निर्दोष व्यापारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जौनपुर। जनपद में कोडीन कफ सिरप तस्करी के प्रकरण में नित्य नए खुलासों ने दवा बाजार में खलबली मचा दी है। इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए नगर के दवा व्यवसायियों ने जहांगीराबाद स्थित दवा मंडी में एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर चल रहे इस अवैध कारोबार की कड़े शब्दों में निंदा की गई और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाई गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र कुमार ने कहा... बोगस लाइसेंस के जरिए देश-विदेश तक फैला यह काला कारोबार दवा व्यवसाय की गरिमा पर कलंक है।लेकिन इसके लिए सिर्फ दवा व्यवसायी ही जिम्मेदार नहीं हैं। दवा निर्माता कंपनियां, लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी और पिछले 10 वर्षों से जांच के नाम पर खानापूर्ति करने वाले अधिकारी भी बराबर के भागीदार हैं। उन्होंने मांग की कि जांच का दायरा बढ़ाया जाए और उन डिपो इंचार्ज, सेल्स टीम व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो, जिन्होंने पूर्व में इन बोगस फर्मों को श्क्लीन चिटश् दी या पुराने लाइसेंस निरस्त कर नए जारी किए।संगठन के महामंत्री राजेंद्र निगम ने जांच के नाम पर आम दवा व्यवसायियों के शोषण पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों में बुलाकर व्यवसायियों को हतोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि फर्जी लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी तो जांच से बाहर हैं, लेकिन अनुभव प्रमाण पत्र देने वाले व्यापारियों को पूछताछ के नाम पर परेशान किया जा रहा है, जो सरासर अनुचित है। दवा व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि वे अवैध कारोबार के खिलाफ हैं, लेकिन जांच के नाम पर निर्दोष व्यापारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जौनपुर। जनपद में कोडीन कफ सिरप तस्करी के प्रकरण में नित्य नए खुलासों ने दवा बाजार में खलबली मचा दी है। इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए नगर के दवा व्यवसायियों ने जहांगीराबाद स्थित दवा मंडी में एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर चल रहे इस अवैध कारोबार की कड़े शब्दों में निंदा की गई और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाई गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र कुमार ने कहा... बोगस लाइसेंस के जरिए देश-विदेश तक फैला यह काला कारोबार दवा व्यवसाय की गरिमा पर कलंक है।लेकिन इसके लिए सिर्फ दवा व्यवसायी ही जिम्मेदार नहीं हैं। दवा निर्माता कंपनियां, लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी और पिछले 10 वर्षों से जांच के नाम पर खानापूर्ति करने वाले अधिकारी भी बराबर के भागीदार हैं। उन्होंने मांग की कि जांच का दायरा बढ़ाया जाए और उन डिपो इंचार्ज, सेल्स टीम व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो, जिन्होंने पूर्व में इन बोगस फर्मों को श्क्लीन चिटश् दी या पुराने लाइसेंस निरस्त कर नए जारी किए।संगठन के महामंत्री राजेंद्र निगम ने जांच के नाम पर आम दवा व्यवसायियों के शोषण पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस थानों में बुलाकर व्यवसायियों को हतोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने सवाल उठाया कि फर्जी लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारी तो जांच से बाहर हैं, लेकिन अनुभव प्रमाण पत्र देने वाले व्यापारियों को पूछताछ के नाम पर परेशान किया जा रहा है, जो सरासर अनुचित है। दवा व्यवसायियों ने स्पष्ट किया कि वे अवैध कारोबार के खिलाफ हैं, लेकिन जांच के नाम पर निर्दोष व्यापारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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