वन्देमातरम अष्टापंचाशत् श्रृंखला
राजेंद्र नाथ तिवारी, कौटिल्य वार्ता
1875 को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 'आनंदमठ' उपन्यास में वंदे मातरम की रचना की, जो मातृभूमि की आराधना का प्रतीक बना। स्वतंत्रता संग्राम में यह नारा बन गया, लेकिन धार्मिक व्याख्या और राजनीतिक तुष्टिकरण ने इसे बार-बार विवादों में घसीटा। 150 वर्ष बाद भी, दिसंबर 2025 के संसदीय सत्र में पीएम मोदी और अमित शाह ने कांग्रेस-नेहरू पर "गीत तोड़ने" का आरोप लगाकर बहस छेड़ी।
यह लेख विवादों की पूरी समयरेखा विस्तार से प्रस्तुत करता है, स्रोतों के आधार पर। प्रारंभिक जन्म और ब्रिटिश दमन (1875-1905)बंकिम ने इसे बंगाली पत्रिका 'बंगदर्शन' में प्रकाशित किया, जहां माता दुर्गा को भारत माता के रूप में चित्रित किया। 1886 के कोलकाता कांग्रेस सत्र में हेमचंद्र बनर्जी ने अंश गाए। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने संगीतबद्ध कर कलकत्ता कांग्रेस में पहली बार पूर्ण गाया।
1905 बंगाल विभाजन पर स्वदेशी आंदोलन में वाराणसी कांग्रेस अधिवेशन ने अपनाया। ब्रिटिश घबरा गए; नवंबर 1905 रंगपुर स्कूल में 200 छात्रों पर जुर्माना भी लगा दिया।
स्वदेशी आंदोलन में चरम दमन (1905-1911)1906 बरिसाल सम्मेलन पर अप्रैल में पूर्ण प्रतिबंध लगगया। मई 1907 लाहौर जुलूस दमन की प्रक्रिया भी अंग्रेजो ने अपनाया। 27 फरवरी 1908 तूतीकोरिन हड़ताल में रात्रि जुलूस निकला जिसका प्रतीकर अंग्रेजो ने जमकर किया। 30 दिसंबर 1908 अमृतसर मुस्लिम लीग अधिवेशन में सैयद अली इमाम का पहला विरोध किया अगर यही दबाड़िया गया होता तो वन्देमातरम विभाजन हमेशा क़े लिए समाप्त होजाता।
1911 बंगाल विभाजन रद्द, लेकिन सांप्रदायिक बीज बोया। खिलाफत काल और कांग्रेस का समझौता (1919-1937)1919-1924 खिलाफत आंदोलन में गांधी ने समर्थन किया, लेकिन धार्मिक स्वर पर सावधानी बरती। 1937 फरवरी-मार्च में नेहरू समिति (गांधी, पटेल, बोस, आजाद, नायडू सहित) ने मुस्लिम क़े लीग दबाव में केवल दो ही छंद स्वीकारे। यही से हमारे नेताओं का पलायन वन्देमातरम से शुरू हुआ.कारण: तीसरे-चौथे छंद में "सप्तकोटी कन्या" व दुर्गा स्तुति, जो मूर्तिपूजा जैसी लगी।
जिन्ना का आक्रमण और विभाजन की भूमिका (1938-1947)17 मार्च 1938 को जिन्ना का नेहरू को पत्र: "मुस्लिम विरोधी, हटा दो।" 1 मार्च 1938 न्यू टाइम्स लेख में लिखा गया और मुस्लिम लीग ने इसे बहाना बनाया। 14 अगस्त 1947 संविधान सभा में गाया गया भी गया।
26 अगस्त 1947 एच.वी. कामथ की आपत्ति कुछ सदस्यों के देरी पर भी थी। संविधान सभा बहस और राष्ट्रीय गीत पर हुई (1947-1950)24 जनवरी 1950 राष्ट्रगीत घोषित, जन गण मन राष्ट्रगान। नेहरू ने 1948 नोट में तर्क: संगीत जटिल, 'आनंदमठ' से जुड़ाव मुस्लिमों को असहज। एकप्रकार से नेहरू विभाजन क़े जनक भी रहे,सिख, जैन, ईसाई संगठनों ने भी धार्मिक आपत्ति जताई।
आधुनिक पुनरुत्थान और स्कूल विवाद (2006-2017)नवंबर 2006 देवबंद फतवा: अनिवार्य गान अस्वीकार। 2017 यूपी सरकार निर्देश पर ओवैसी का इनकार। हालिया राजनीतिक उबाल (2019-2026)2019 मध्य प्रदेश आरिफ मसूद इनकार। 2022 कर्नाटक सिद्धारमैया। नवंबर 2025 150वीं वर्षगांठ: मोदी का "विभाजनकारी सोच" बयान। दिसंबर 2025 संसद: शाह की लिस्ट (इमरान मसूद, बर्क, आलम)।
कांग्रेस पलटवार: टैगोर पत्र भी उद्धृत। विवादों का विश्लेषण: राष्ट्रवाद आत्म नाम तुष्टिकरणविवाद मूलतः व्याख्या का: माता=दुर्गा या भूमि? ब्रिटिश ने दबाया, लीग ने सांप्रदायिक बनाया, कांग्रेस ने एकता हेतु समझौता। भाजपा इसे राष्ट्रनिर्माण चुनौती बताती। आज 140 करोड़ भारतीयों के लिए यह एकता का सूत्र है वन्देमातरम।
इतिहास से सबक वंदे मातरम विवाद राष्ट्रवाद की परीक्षा है। पूर्ण गान गाकर हम अतीत को सम्मान दें। कौटिल्य नीति कहती: राष्ट्र सर्वोपरि, इसे गाकर हम वन्देमातरम की रुकी प्रतिष्ठा स्थापित कर सकतें है.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें