केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोनिया गांधी पर नेहरू के 51 बॉक्स दस्तावेजों को छिपाने का सीधा आरोप लगाते हुए अपील की है, जो देश की राष्ट्रीय धरोहर हैं। नेहरू पहले प्रधानमंत्री थे, इसलिए उनके पत्र सार्वजनिक संपत्ति हैं—इन्हें निजीकरण करना विश्वासघात है, जिस पर तत्काल एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। यह गांधी परिवार का राष्ट्र के प्रति अपमान है, कानूनी कार्रवाई से बचना अन्याय होगा।
विवाद की आक्रामक पृष्ठभूमि2008 में यूपीए शासनकाल में सोनिया गांधी ने 51 बॉक्स (21-26 हजार पृष्ठ) औपचारिक रूप से PMML से ले लिए, जिनमें नेहरू-एडविना माउंटबेटन, आइंस्टीन, जेपी नारायण जैसे पत्र शामिल हैं। शेखावत ने कटाक्ष किया: "क्या छिपा रही हैं सोनिया? ये निजी संपत्ति नहीं, राष्ट्र की विरासत हैं।" PMML ने दो पत्र भेजे, कोई जवाब नहीं—अब कानूनी कदम उठाने का समय आ गया।
एफआईआर का कानूनी आधारये दस्तावेज दान या उपहार नहीं, बल्कि सुरक्षित रखने के लिए दिए गए थे; इन्हें न लौटाना IPC धारा 403 (अपराधिक विश्वासघात), 406 (आपराधिक विश्वास तोड़ना) या पुरातत्व अधिनियम का उल्लंघन है। PMML सोसाइटी AGM ने फैसला लिया: लौटाएं वरना अदालत। नेहरू के पद से पत्र देश के हैं—परिवार का हड़पना चोरी जैसा अपराध।
राजनीतिक आक्रमकता की मांगकांग्रेस चुप्पी साधे है, जयराम रमेश जैसे नेता बहाने बना रहे—यह साजिश है नेहरू के 'कारनामों' को दबाने की। सरकार को तुरंत CBI जांच शुरू कर सोनिया पर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए, वरना राष्ट्रवादी भावना का अपमान। दस्तावेज लौटें, वरना गांधी परिवार की नीयत पर सवाल उठेंगे।

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