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बुधवार, 24 दिसंबर 2025

ठाकुर-ब्राह्मण विधायकों की बैठकों का राजनीतिक भूकंप

 वेद प्रकाश सिंह



लखनऊ उत्तर प्रदेश
:
 ठाकुर-ब्राह्मण विधायकों की बैठकों का राजनीतिक भूकंप सवर्ण असंतोष का उदय,उत्तर प्रदेश में ठाकुर विधायकों का 'कुटुंब परिवार' और ब्राह्मण विधायकों का 'सहभोज' सवर्ण समाज में गहराते असंतोष को प्रतिबिंबित करता है। ये बैठकें विधानसभा सत्र के बीच हुईं, जहां 40-50 विधायकों ने संगठन व सरकार में अपनी उपेक्षा पर चर्चा की। तार्किक रूप से, यह भाजपा के कोर वोट बैंक में दरार डाल रहा है, जो 2027 चुनावों को प्रभावित करेगा।


 पी.एन. पाठक जैसे ब्राह्मण नेताओं का नेतृत्व विधायकों को एकजुट कर रहा है, जो टिकट व पदों की मांग कर रहे हैं। इससे हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है, अन्यथा विधायी कामकाज बाधित होगा।जातिगत समीकरणों का पुनर्गठन ठाकुर (8-10%) और ब्राह्मण (10-12%) मिलकर 20% वोट प्रभावित करते हैं, खासकर पूर्वांचल-बुंदेलखंड में। असंतोष से भाजपा की 100+ सीटें खतरे में हैं, जबकि विपक्ष सपा-बसपा सवर्ण चेहरों को आगे बढ़ाकर लाभ लेगा।
 यह 2022 उपचुनावों की तर्ज पर वोट ध्रुवीकरण को तेज करेगा।विपक्ष को रणनीतिक अवसर अखिलेश यादव ब्राह्मण नेताओं को टिकट देकर सेंध लगा रहे हैं, जबकि बसपा पिछड़ों के साथ सवर्ण नाराजगी भुनाएगी। तार्किक विश्लेषण से, भाजपा का वोट शेयर 5-7% गिर सकता है, जिससे गठबंधन की मजबूरी बढ़ेगी। शहरी सीटों पर यह प्रभाव सबसे अधिक दिखेगा।दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन,ये बैठकें 'सवर्ण एकता' का नया दौर शुरू कर रही हैं, जो हिंदुत्व से इतर जातिगत हितों (आरक्षण विरोध, विकास बजट) पर केंद्रित है। 2027 तक क्षेत्रीय सवर्ण संगठनों का उदय हो सकता है, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति को जाति-केंद्रित बन सकता है। कुल असर सरकार की नीतियों व चुनावी रणनीति पर रहेगा।बिशेषज्ञयो का कहना है यदि डैमेज कंट्रोल तत्काल न किया गया तो परिणाम जहाँ घातक होसकते है, वही अनुत्तरीत अनेक सामाजिक संदेश भी!
तात्कालिक विधायी दबाव कैबिनेट विस्तार की अटकलों के बीच ये घटनाएं योगी सरकार की स्थिरता को चुनौती दे रही हैं। 

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