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रविवार, 28 दिसंबर 2025

वज्रपात, ठंड से बचने को जलाया कोयले की अंगीठी ने लील लिया चार जिंदगीयां



छपरा, वाराणसी

सहकारी अफसर पर टूटा दुखों का पहाड़: ठंड से बचने को जलाई अंगीठी, सुबह बुझ गईं चार जिंदगियां
कड़ाके की ठंड ने एक बार फिर लापरवाही और व्यवस्था की कमजोरियों के बीच इंसानी जिंदगी की भारी कीमत वसूल ली। ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई गई अंगीठी एक पूरे परिवार के लिए काल बन गई। सुबह जब दरवाजा खुला, तो घर के भीतर चार जिंदगियां हमेशा के लिएखमोश हो चुकी थीं। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक  अधिकारी के जीवन को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है।

रात ठंड से लड़ने की कोशिश, सुबह मौत की खबर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भीषण ठंड के चलते परिवार ने रात में कमरे के भीतर अंगीठी जलाई थी। सर्द हवा से बचने के लिए दरवाजे-खिड़कियां बंद कर ली गईं। आशंका जताई जा रही है कि अंगीठी से निकली जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस धीरे-धीरे कमरे में भरती चली गई। नींद में ही दम घुटने से चारों की मौत हो गई।सुबह जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई और दरवाजा नहीं खुला, तो आसपास के लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। दरवाजा खोलते ही अंदर का दृश्य देख सभी सन्न रह गए। कमरे में मौजूद सभी लोग बेसुध पड़े थे। सूचना पर पहुंची पुलिस और चिकित्सकों की टीम ने चारों को मृत घोषित कर दिया।

 अधिकारी के परिवार पर वज्रपात

इस हादसे में अधिकारी ने अपने परिवार के चार बेहद करीबी सदस्यों को खो दिया। जिस घर में कल तक जीवन, जिम्मेदारियों और सपनों की आवाजाही थी, वहां आज मातम पसरा हुआ है। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए दूसरों की समस्याएं सुलझाने वाले अफसर के सामने आज खुद की जिंदगी का सबसे बड़ा संकट खड़ा है।करीबी लोगों का कहना है कि  अधिकारी गहरे सदमे में हैं। शब्द उनके दुख को व्यक्त नहीं कर पा रहे। पूरा परिवार और परिचित स्तब्ध हैं कि एक सामान्य सी ठंड से बचने की कोशिश इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी।

कार्बन मोनोऑक्साइड: खामोश कातिल

विशेषज्ञों के अनुसार, अंगीठी, कोयला या लकड़ी जलाने से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रंगहीन, गंधहीन और अत्यंत जहरीली होती है। बंद कमरे में इसका रिसाव जानलेवा साबित होता है। अक्सर लोग ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाते हैं, लेकिन पर्याप्त वेंटिलेशन न होने पर यह जानलेवा बन जाती है।डॉक्टरों का कहना है कि सोते समय इस गैस का असर और घातक होता है, क्योंकि व्यक्ति को दम घुटने का अहसास भी नहीं हो पाता।

प्रशासन और समाज के लिए चेतावनी

यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासन—दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। हर साल ठंड के मौसम में इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, इसके बावजूद जागरूकता और सुरक्षा उपायों की अनदेखी होती रहती है।विशेषज्ञों का कहना है कि—बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाना खतरनाक है,यदि मजबूरी हो तो पर्याप्त हवा का इंतजाम जरूरी है गस हीटर या ब्लोअर जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाए जाएं,जांच में जुटी पुलिस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में दम घुटने से मौत की पुष्टि हो रही है, हालांकि अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

शोक की लहरइ,,स दर्दनाक घटना से प्रशासनिक हलकों में भी शोक की लहर है। अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कई लोगों ने इसे “ठंड के मौसम की सबसे भयावह चेतावनी” बताया है।एक सीख, जो जान बचा सकती हैयह हादसा याद दिलाता है कि छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है। ठंड से बचने के उपाय करते समय सुरक्षा को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।चार जिंदगियां तो बुझ गईं,लेकिन यदि इससे समाज जाग गया,तो शायद किसी और घर में सुबह का सन्नाटा मातम में न बदले।

घटनाएं घटती रहती है और हम भूलने के अभ्यासी हैं अगर ना भूले तो का ल इतना नर्दयी निर्णय नहीं ले सकता🙏


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