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रविवार, 28 दिसंबर 2025

क्यों बना वन्देमातरम राष्ट्रद्रोह का गीत!( 50)

 वन्देमातरम पञ्चाशत् श्रृंखला =50)


वन्दे मातरम गीत ब्रिटिश राजद्रोह का शिकार बना क्योंकि यह स्वराज्य की लौ जला रहा था, जबकि मुस्लिम लीग ने इसे धार्मिक आधार पर अस्वीकार किया। श्री अरविंद के 'बंदे मातरम' अखबार पर कलकत्ता हाईकोर्ट में मुकदमा चला, जो राष्ट्रवादी आंदोलन का केंद्र था।ब्रिटिश राजद्रोह मुकदमे1906 में श्री अरविंद घोष ने कलकत्ता से 'बंदे मातरम' अखबार शुरू किया, जो ब्रिटिश शासन के विरुद्ध लेखों से भरा था और बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन को प्रेरित करता था। 1907 में ब्रिटिश सरकार ने इसे राजद्रोही घोषित कर आईपीसी धारा 124A के तहत संपादकों पर मुकदमा चलाया; अरविंद को 16 अगस्त को गिरफ्तार किया गया, पर मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड ने अपर्याप्त साक्ष्यों से बरी कर दिया।

 युगांतर जैसे अन्य पत्रों के साथ यह क्रांति का माध्यम बना, जहां गुरिल्ला युद्ध के निर्देश तक प्रकाशित हुए। बंगाल नेशनल कॉलेज में अरविंद के प्राचार्य काल (1906) ने इसे राष्ट्रवादी शिक्षा का केंद्र बनाया।सार्वजनिक दमन बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में वन्दे मातरम का जाप नारों में बदल गया; रंगपुर में 200 छात्रों पर ब्रिटिशों ने 5-5 रुपये जुर्माना लगाया।

 दक्षिण में वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई जैसे स्वदेशी आंदोलनकारियों पर भी राजद्रोह केस चले, जहां गीत ने शिपिंग कंपनी स्थापना को प्रेरित किया। अलीपुर बम कांड (1908) में अरविंद को फिर फंसाया गया, पर जेल में उन्होंने ब्रह्म चेतना प्राप्त की।मुस्लिम लीग की आपत्ति1909 अमृतसर अधिवेशन में जिन्ना ने वन्दे मातरम को 'मूर्तिपूजा' कहा, क्योंकि छंदों में दुर्गा-लक्ष्मी का वर्णन था। 1920-30 में लीग ने इसे अस्वीकार कर कांग्रेस से विभाजन तेज किया; अबुल कलाम आजाद ने भी इस्लामी सिद्धांतों के विरुद्ध बोला।1937 फैजपुर अधिवेशन में नेहरू ने केवल पहले दो छंद अपनाए।संविधान सभा विवाद1949 में सेठ गोविंद दास की मांग पर बहस हुई; मुस्लिम-सिख सदस्यों ने धार्मिक आपत्ति जताई, जबकि मुखर्जी ने इसे स्वतंत्रता मंत्र कहा।

 'जन गण मन' को राष्ट्रगान बनाया गया, वन्दे मातरम राष्ट्रगीत।राष्ट्रवादी विरासततिलक-सुभाष जैसे नेताओं ने इसे अपनाया; आज कुटिल्य वर्ता जैसे मंच राष्ट्रवाद जगाते हैं।


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