विधायक की दबंगई उजागर: अधिकारी को “नंगा कर घुमाने” की धमकी, आज़ाद अधिकार सेना ने FIR की माँग की
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)।
राजनीति में मर्यादा, भाषा और आचरण की गिरती सीमाओं का ताज़ा उदाहरण उस समय सामने आया जब एक जनप्रतिनिधि ने अपने संवैधानिक दायित्वों को धता बताते हुए खुलेआम एक अधिकारी को “नंगा कर घुमाने” जैसी शर्मनाक धमकी दे डाली।घटना के बाद आज़ाद अधिकार सेना ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर मानते हुए BNSS की धारा 173(1) के अंतर्गत विधायक विनय वर्मा के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की औपचारिक मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में कहा है कि—“यदि कोई विधायक, वह भी सत्ता पक्ष का, प्रशासनिक अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, धमकाने और विवश करने जैसी भाषा का उपयोग करे, तो यह केवल कदाचार नहीं बल्कि लोकतंत्र पर खुला हमला है।”न pठन ने मीडिया में वायरल उस वीडियो का हवाला दिया है जिसमें कथित रूप से विधायक अपने पद के दुरुपयोग की सीमा लाँघते हुए अधिकारी को धमकाते सुनाई दे रहे हैं।
यह सिर्फ भाषा का अपराध नहीं — यह लोकतांत्रिक अनुशासन की हत्या है
किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा सरकारी अधिकारी को धमकाना
पमानजनक भाषा का प्रयोगसं,विधानिक प्रक्रिया को तोड़ने की घोषणा ,सभी कृत्य भारतीय दंड संहिता (BNSS) की कई धाराओं में स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में आते हैं।
अमिताभ ठाकुर ने पत्र में लिखा है कि यह मामला धारा 221, 224, 351, 352, 356 सहित अन्य धाराओं में भी संज्ञेय अपराध बनता है और यदि प्रशासन चुप रहता है तो “यह चुप्पी ही लोकतांत्रिक तंत्र को खोखला कर देगी”।
जनता पूछ रही है—क्या विधायक कानून से ऊपर है?
जिस अधिकारी को संविधान ने कर्तव्य दिया है, जिस पर जनता की सेवा का दायित्व है—उसी को धमकाकर अपमानित करने की भाषा लोकतंत्र के मर्यादित ढाँचे में कहीं नहीं आती।
आज जनता पूछ रही है:क्या यूपी में अब अधिकारी खुलेआम धमकाए जाएँगे?क्या विधायक कानून से ऊपर हैं?क्य प्रशासन भय के साए में काम करेगा?FIR की मांग पर प्रशासन की अगली कार्यवाही पर नज़रअज़ाद अधिकार सेना ने स्पष्ट कहा है कि यदि FIR दर्ज न हुई तो वे इसे राज्यव्यापी अभियान बनाएँगे।
यह मामला केवल एक अधिकारी का अपमान नहीं—बल्कि संवैधानिक मर्यादा, सरकारी सिस्टम और जनता के विश्वास का का है.

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