रामेश्वर स्थापना व अंगद रावण संवाद की लीला में खूब बजी तालियाँ
हुआ शस्त्र का प्रदर्शन, आत्मरक्षा के दिखे कौशल
बस्ती। सनातन धर्म संस्था द्वारा चल रही श्री रामलीला महोत्सव के आठवें दिन के मंचन का शुभारंभ नित्य की भांति प्रभु श्री राम लक्ष्मण हनुमानजी के सजीव झांकी के समक्ष पूजन, आरती, स्तुति के साथ प्रारंभ हुआ आरती में मुख्य रूप से अतुल चित्रगुप्त, प्रदीप पांडेय, अंकुर यादव, राम प्रकाश, पारिजात पांडेय, हरीश त्रिपाठी, कर्नल के सी मिश्र, अवनि मिश्र, सर्वेश श्रीवास्तव सुनील सिंह, आदि लोग उपस्थित रहे।
श्री रामलीला के प्रसंग में प्रथम भाग में जागण पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा विभीषण शरणागति और शुक शारण संवाद व समुद्र पर कोप, सेतु निर्माण के प्रसंग का मंचन किया जाता है। प्रभु राम सुग्रीव जी को आदेश देते हैं कि अब हमें विलंब नहीं करना चाहिए अपनी सेना तैयार कीजिए और हम सब लंका की ओर प्रस्थान करते हैं सभी वानर भालूगण प्रभु की जय-जय कर हर हर महादेव के उद्घोष के साथ तैयारी करते हैं। पापियों के नाश को धर्म के प्रकाश को एक नई जोत चली श्री रामजी की सेना चली। के उदघोष के साथ सेना लंका की ओर प्रस्थान करती है । गुप्तचर रावण को इसकी सूचना देते हैं। इस पर विभीषण रावण को समझाने का प्रयास करते हैं क्रोध में आकर रावण उन्हें अपने राज्य से निष्कासित कर देते हैं फिर विभीषण प्रभु श्री राम की शरण में आ जाते हैं रावण इनकी सुधि लेने शुक और सारण दूतों को इनके पीछे भेजता है तभी वानर इनको पहचान कर पीटना शुरू कर देते हैं ये प्रभु राम की दुहाई देकर किसी प्रकार अपने प्राणों की रक्षा करते हैं। प्रभु श्री राम के प्रताप से प्रभावित शुक सारन ने भी रावण को माता जानकी को लौटाने की विनती की जिसे सुन रावण क्रोधित हो उन्हें भी निकाल देता है।। इधर राम चन्द्र जी समुद्र से विनती करते तीन दिन बीत जाने के उपरांत क्रोधित हो बाण का संधान करते हैं| विनय न मानति जलधि जड़ गए तीन दिन बीत ,बोले राम स्कोप तब भय बिनु होय न प्रीत।। तब समुद्र देव त्राहिमाम करते सम्मुख प्रकट होते हैं और नल नील को मिले वरदान का प्रयोग करते आप समुद्र पर पुल बनाइये और असुरों का संधान करिए। भगवान ने यही यत्न करते हुऐ, पुल का निर्माण किया। भगवान की सेना लंका के लिए प्रस्थान करती है।
द्वितीय भाग में श्रीनेत ग्लोबल स्कूल बस्ती के बच्चों द्वारा
लीला में दिखाया गया कि भगवान सभा मे सभी मंत्री गण व बंदर भालुओ से विचार मांगते हैं कि आगे की क्या रणनीति बने तब जामवंत जी प्रभु को सलाह देते हैं कि युवराज अंगद को दूत बनाकर लंका में भेजा जाए और रावण को एक अंतिम अवसर प्रदान किया जाए। अंगद के लंका में प्रवेश करते ही रावण के पुत्र से भेंट होती है वाद विवाद के बीच अंगद रावण के पुत्र को धरती पर पटकते हैं जिससे उसकी तत्काल मृत्यु हो जाती है। जो इस दसा को देखते ही सभी राक्षस जहां थे भागने लगे नगर में कोलाहल मच गया कि जिसने लंका जलाई थी वही वानर फिर आ गया है। यह सूचना पाकर रावण अपने दूत भेज कर अंगद को सभा में बुलाता है। अंगद अभिवादन कर रावण को एक बार पुनः मनाने का कार्य करते हैं। अंगद और रावण का लंबा संवाद चलता है तत्पश्चात प्रभु श्री राम की निंदा सुनकर अंगद अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं और तमक कर अपने दोनों भुजाओं को पृथ्वी पर दे मारते हैं। जिससे पृथ्वी हिलने लगी सभी सभासद गिर पड़े और भयभीत होकर भाग गए रावण भी गिरते गिरते संभाल कर उठा उसका अत्यंत सुंदर मुकुट पृथ्वी पर गिर गया कुछ मुकुट तो रावण ने संभाल लिए परंतु कुछ मुकुट अंगद के पास पहुंचा अंगद ने रावण के मुकुट को प्रभु श्री राम के पास भेज दिया रावण क्रोधित हो अपने दूतों को अंगद को बंदी बनाने के लिए भेजते हैं। तब अंगद ने जय श्री राम का जय घोष कर कहा कि प्रभु की आज्ञा नहीं है अन्यथा मैं तेरा विनाश यही कर देता, और इतना कहकर अंगद अपने बल का प्रदर्शन करते हुए भरी सभा में अपने पैरों को जमा लेते हैं और ललकारते हुए बोलते हैं अरे मूर्ख यदि तुममें से कोई मेरा चरण यहां से हटा सके तो मैं वचन देता हूँ कि श्री रामचंद्र जी वापस लौट जाएंगे और मैं माता सीता को हार जाऊंगा, यह मेरा प्रण है। मेघनाथ आदि सभा में उपस्थित सभी योद्धा अंगद के पैर को उठाने का पूरा प्रयास करते हैं किंतु कोई सफल नहीं होता। सब सर नीचा करके अपने-अपने स्थान पर बैठ जाते हैं।
अपने वीरों का अपमान होते देख रावण अपने सिंहासन से उठकर ज्यों ही अंगद के चरण की ओर बढ़ा त्यों ही अंगद ने अपना चरण पीछे हटा लिया और कहा अरे मूर्ख मेरा चरण पकड़ने से तेरा कल्याण नहीं होगा यदि चरण पकड़ना ही है तो जाकर प्रभु श्री रामचंद्र जी के चरण पकड़। अंगद वापस आकर जब सूचना देते हैं कि रावण ने इस अंतिम प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है तब प्रभु श्री राम सेना को आक्रमण करने का आदेश देते हैं। पूरे पांडाल में भगवान का जयघोष के साथ भगवान की शयन आरती के साथ आठवें दिन की लीला का विश्राम हुआ।
शयन आरती में हरीश द्विवेदी, आशिमा सिंह, डॉ0 डी के गुप्ता, राजकुमार शुक्ल, दयाभान सिंह, दिलीप पांडेय, अमित सिंह राहुल मनमोहन श्रीवास्तव, राखी दूबे, अर्चना दूबे, अभय, उपस्थित रहे।


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