सम्पूर्ण समाधान दिवस: बस्ती में जन शिकायतों का निस्तारण - अपेक्षा पर खरा या खोटा?
बस्ती
बस्ती जिले के रूधौली तहसील में 18 अक्टूबर 2025 को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस एक सराहनीय प्रयास था। जिलाधिकारी रवीश गुप्ता की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों से जुड़ी 24 शिकायतें सुनी गईं, जिनमें से 5 का मौके पर ही निस्तारण हो गया। शेष मामलों को समयबद्ध तरीके से हल करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। यह आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जन शिकायतों के त्वरित समाधान का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां भूमि विवादों को प्राथमिकता दी गई और शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल पर फीडबैक लेने का सुझाव दिया गया।
सकारात्मक पहलू: अपेक्षा पर खरा उतरने के संकेत
त्वरित कार्रवाई: कुल 24 मामलों में 21% (5 मामले) का तत्काल निस्तारण होना एक अच्छा संकेत है। राजस्व विभाग (19 मामले) प्रमुख था, जबकि अन्य विभागों (समाज कल्याण, विद्युत, कृषि, वन, पूर्ति) से एक-एक शिकायत थी। यह दर्शाता है कि आयोजन ने कम से कम कुछ लोगों को तुरंत राहत दी।
निर्देशों की स्पष्टता: डीएम ने अधिकारियों को सहज संवाद, स्थलीय निरीक्षण और गुणवत्ता पूर्ण समाधान पर जोर दिया। एसपी अभिनंदन ने पुलिस मामलों के लिए तत्परता के निर्देश दिए। यह पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम है।
उपस्थिति और समन्वय: डीडीओ अजय कुमार सिंह, पीडी राजेश कुमार, डीपीआरओ धनश्याम सागर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जो विभागीय समन्वय को मजबूत बनाता है।
समान आयोजनों से तुलना: उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों (जैसे कुशीनगर में 45 में से 5 त्वरित निस्तारण) में भी इसी तरह की सफलता देखी गई है, जहां निर्देशों पर अमल से संतुष्टि बढ़ी। जौनपुर में एक दिव्यांग की शिकायत मात्र 2 घंटे में हल हो गई, जो ऐसी व्यवस्था की क्षमता दिखाता है।
चुनौतियां: खोटे पहलू जो अपेक्षाओं से कम रखते हैं
पूर्ण निस्तारण की कमी: 19 मामलों का अभी लंबित रहना (केवल 21% त्वरित हल) अपेक्षा से कम है। अतीत के उदाहरणों में, जैसे गाजियाबाद में 130 में से केवल 11 (8%) का निस्तारण हुआ, या ललितपुर में 24 में से 2 (8%), यह पैटर्न दर्शाता है कि जटिल मामले (जैसे भूमि विवाद) अक्सर विलंबित हो जाते हैं। बस्ती में भी राजस्व-केंद्रित शिकायतें इसी श्रेणी में आती हैं।
लंबी अवधि की प्रभावशीलता: निर्देश तो दिए गए, लेकिन फॉलो-अप (जैसे मोबाइल फीडबैक) का व्यावहारिक अमल हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। जनसुनवाई पोर्टल (jansunwaiup.com) पर शिकायत ट्रैकिंग उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कम होने से कई लोग दोबारा आने को मजबूर होते हैं।
व्यापक संदर्भ: पूरे यूपी में सम्पूर्ण समाधान दिवस (मासिक प्रथम/तृतीय शनिवार को) का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि औसतन 10-20% ही त्वरित हल होते हैं। यदि बस्ती के शेष 19 मामलों का निस्तारण 5-7 दिनों में न हो, तो यह अपेक्षा पर खरा नहीं उतरेगा।
निष्कर्ष: आंशिक रूप से खरा, लेकिन सुधार की गुंजाइश
यह आयोजन अपेक्षा पर आंशिक रूप से खरा उतरा, क्योंकि त्वरित निस्तारण और मजबूत निर्देशों ने विश्वास जगाया। हालांकि, शेष मामलों का लंबित रहना खोटा पहलू है, जो सिस्टम की जड़ों (जैसे कर्मचारी लापरवाही या संसाधन कमी) को उजागर करता है। सरकार की पहल सराहनीय है, लेकिन वास्तविक सफलता तब होगी जब 80-90% शिकायतें समय पर हल हों। नागरिकों को सलाह: जनसुनवाई पोर्टल पर स्टेटस चेक करें और फीडबैक दें। यदि आप किसी विशिष्ट मामले से जुड़े हैं, तो अधिक विवरण साझा करें - मैं सहायता के लिए और खोज सकता हूं।
(नोट: विश्लेषण प्रदानित रिपोर्ट और समान आयोजनों के सामान्य आंकड़ों पर आधारित है। कोई व्यक्तिगत पूर्वाग्रह नहीं।)

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