उत्तर प्रदेश की सहकारिता को सर्वव्यापी करने वाले आदर्श शिल्पी ,जेपीयस राठौर

 

​सहकारिता का युगांतकारी नव-उत्कर्ष: ढहते ढांचों से वैश्विक महाशक्ति बनने का स्वर्णिम मार्ग के  शिल्पी 

जेपीसी राठौर 

बस्ती, 272001

सहकारिता केवल एक आर्थिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना और आत्मनिर्भरता का वह अनुपम दर्शन है जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ता है। भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की इस जीवन-रेखा ने एक लंबा उतार-चढ़ाव देखा है। उत्तर प्रदेश की पावन धरा पर एक समय ऐसा भी आया जब यह जन-आंदोलन शिथिल और मृतप्राय हो चला था। किंतु, वर्तमान युग में दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, अभूतपूर्व नीतिगत निर्णयों (NEET) और आधुनिक दूरदर्शिता के त्रिवेणी संगम ने इस मुरझाए वृक्ष को न केवल पल्लवित किया है, बल्कि इसे संपूर्ण भारतवर्ष को वैश्विक महाशक्ति बनाने के एक अचूक विज़न के रूप में स्थापित कर दिया है।

​ मृतप्राय संस्थाओं का पुनर्जन्म: एक साहसिक भागीरथी प्रयास,,उत्तर प्रदेश में सहकारिता का इतिहास जितना गौरवशाली रहा, एक दौर में उसकी स्थिति उतनी ही जर्जर हो चुकी थी। लगभग १६ सहकारी बैंक वित्तीय संकट, कुप्रबंधन और नियामक संस्थाओं के कड़े मापदंडों के कारण दम तोड़ रहे थे। इन बैंकों का मुख्यधारा से कटना केवल संस्थाओं का अंत नहीं था, बल्कि करोड़ों ग्रामीणों और किसानों के भरोसे की हत्या जैसा था।इस घनघोर निराशा के बीच, उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री जे.पी.एस. राठौर ने एक कुशल सारथी की भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी संपूर्ण सांगठनिक क्षमता, अटूट ऊर्जा और साहसिक रणनीतिक कौशल को इस व्यवस्था को पुनर्जीवित करने में झोंक दिया। उन्होंने कड़े और सुधारात्मक कदम उठाए, नियमों को पारदर्शी बनाया और व्यवस्था में व्याप्त जड़ता को समूल नष्ट कर दिया। यह प्रयास केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि ढहती हुई सहकारिता के मलबे से एक अभेद्य मीनार खड़ी करने का ऐतिहासिक अनुष्ठान था।

​तकनीक का महाशंखनाद: ₹२० लाख का डिजिटल आयाम,आधुनिक युग में कोई भी आंदोलन बिना तकनीक के वैश्विक स्वरूप नहीं ले सकता। सहकारिता विभाग ने इस यथार्थ को आत्मसात किया। प्राथमिक स्तर की समितियों (PACS) और सहकारी बैंकों को आधुनिक व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता में बनाए रखने के लिए एक अभूतपूर्व तकनीकी आयाम दिया गया।

  • डिजिटल क्रांति और पूर्ण पारदर्शिता: ₹२० लाख तक की दूरदर्शी तकनीकी निवेश और बुनियादी ढांचा योजनाओं के माध्यम से समितियों का कायाकल्प किया गया। कंप्यूटर, कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (CBS) और आधुनिक सॉफ्टवेयर ने इस पूरे ढांचे को पारदर्शी बना दिया।
  • कॉर्पोरेट कुशलता: इस तकनीकी समावेशन ने सदियों पुरानी फाइलों में दबी सहकारिता को आधुनिक व्यावसायिक गति दी। जो संस्थाएं कभी घाटे का पर्याय थीं, वे आज अत्याधुनिक वित्तीय केंद्रों की तरह काम कर रही हैं।

​ 'सहकार से समृद्धि': उत्तर प्रदेश से वैश्विक फलक तक का विज़न,,उत्तर प्रदेश में सहकारिता के इस पुनरुद्धार ने संपूर्ण राष्ट्र के सामने एक नया प्रतिमान (Benchmark) स्थापित किया है। आज उत्तर प्रदेश का यह 'सफलता का मॉडल' केवल एक राज्य की सीमा में आबद्ध नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण भारतवर्ष के लिए एक महान दृष्टिकोण (Grand Vision) बन चुका है।

"सहकार से समृद्धि" का यह उद्घोष आज भारत को इक्कीसवीं सदी की एक वैश्विक महाशक्ति (Global Superpower) बनाने का सबसे सुदृढ़ आधार स्तंभ है। जब देश के सुदूर गांवों में बैठा हुआ किसान, लघु उद्यमी और हस्तशिल्पी सहकारिता के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होगा, तब भारत की सामूहिक शक्ति को वैश्विक मंच पर सिरमौर बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।

दो रुपये के न्यूनतम आधारभूत स्तर से उठकर, लाखों-करोड़ों किसानों के जीवन में समृद्धि का प्रकाश फैलाना और मृतप्राय संस्थाओं को देश के व्यापार की मुख्यधारा में लाकर खड़ा करना एक अभूतपूर्व क्रांति है। श्री जे.पी.एस. राठौर और वर्तमान सरकार के ये प्रयास इस बात के जीवंत प्रमाण हैं कि यदि नेतृत्व में ईमानदारी और नीतियों में स्पष्टता हो, तो इतिहास बदला जा सकता है। उत्तर प्रदेश की धरती से उपजा यह सहकारिता का नया स्वरूप आज पूरे भारत की धड़कन और वैश्विक महाशक्ति बनने का सबसे बड़ा विज़न बन चुका है।

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