हरैया में पोस्टर पॉलिटिक्स: बैनर भले फट जाएं, जनता के दिलों से जगह छीनना नामुमकिन
लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत और बुनियादी विशेषता है—स्वस्थ वैचारिक प्रतिस्पर्धा। चुनाव और प्रचार इसके अहम माध्यम हैं। लेकिन जब यह प्रतिस्पर्धा व्यक्तिगत ईर्ष्या, नफरत और असहिष्णुता का रूप ले ले, तो लोकतांत्रिक मर्यादाएं तार-तार होने लगती हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की हरैया विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मी को पूरी तरह गरमा दिया है। यहां चुनावी या प्रचार माध्यमों के तौर पर लगे बैनर-पोस्टरों को फाड़ने और उखाड़ने का एक बेहद निंदनीय और ओछा कृत्य लगातार देखने को मिल रहा है।
घटनाक्रम और विवाद की जड़,मामले की शुरुआत तब हुई जब हरैया विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता देवेंद्र कुमार सिंह के प्रचार बैनर और होर्डिंग्स लगाए गए थे। हाल ही में, कुछ अज्ञात और असामाजिक तत्वों ने रात के अंधेरे में या सुनसान मौकों का फायदा उठाकर इन पोस्टरों को आक्रामक तरीके से फाड़ डाला और कुछ जगहों से उखाड़ फेंका। फटे हुए बैनरों की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर आईं, तो यह साफ हो गया कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक द्वेष से प्रेरित एक सोची-समझी साजिश है।इस घटना ने क्षेत्र में 'पोस्टर पॉलिटिक्स' (बैनर की राजनीति) को एक नया और आक्रामक मोड़ दे दिया है। लोकतंत्र में पोस्टर किसी भी नेता की बात जनता तक पहुंचाने का एक शांत जरिया होते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह निशाना बनाना विरोधियों की जमीनी हताशा को साफ बयां करता है।
नेता का आक्रामक पलटवार और जनता को संदेश,इस ओछे कृत्य पर शांत बैठने के बजाय, भाजपा नेता देवेंद्र कुमार सिंह ने बेहद आक्रामक और रणनीतिक रूप से पलटवार किया। उन्होंने अपनी आधिकारिक फेसबुक आईडी (Facebook ID) पर फटे हुए बैनर की तस्वीर साझा करते हुए असामाजिक तत्वों और उनके पीछे खड़े राजनीतिक आकाओं को खुली चुनौती दी। देवेंद्र कुमार सिंह ने एक बेहद दमदार और सीधा संदेश देते हुए लिखा: "मैं जनता के दिल में बैठा हूं, वहां से निकालो तो जानी।"यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश है। इसके जरिए उन्होंने अपने विरोधियों को यह समझाने की कोशिश की है कि राजनीति कागजों, कपड़ों या प्लास्टिक के बैनरों के दम पर नहीं, बल्कि जनता के बीच किए गए कामों और उनके भरोसे पर टिकी होती है। बैनर फाड़कर उनकी तस्वीरों को तो नष्ट किया जा सकता है, लेकिन जनता के दिलों में उनके प्रति जो मान-सम्मान और जगह है, उसे मिटाना किसी भी असामाजिक तत्व के बस की बात नहीं है।
क्षेत्रीय राजनीति पर असर और जन-प्रतिक्रिया,देवेंद्र कुमार सिंह के इस आक्रामक और भावुक बयान ने हरैया की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच एक नई ऊर्जा फूंक दी है।कार्यकर्ताओं में भारी रोष: स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो लोग सामने आकर वैचारिक लड़ाई नहीं लड़ सकते, वही लोग इस तरह के डरपोक और कायराना कृत्यों का सहारा ले रहे हैं
हरैया विधानसभा क्षेत्र में घटी यह घटना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि राजनीति में जब विकास और मुद्दों की कमी होती है, तब असहिष्णुता सिर उठाने लगती है। लेकिन जैसा कि भाजपा नेता देवेंद्र कुमार सिंह ने अपने तीखे प्रहार से साफ कर दिया है—लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता की अदालत में होता है। बैनर और होर्डिंग्स को फाड़कर अस्थाई रूप से प्रचार को रोका जा सकता है, लेकिन जनता के दिलों पर राज करने वाले नेताओं की लोकप्रियता को कम नहीं किया जा सकता। यह घटना हरैया की राजनीति में आने वाले दिनों के लिए एक बड़े वैचारिक और आक्रामक दंगल का साफ संकेत दे रही है।
