बिहार एसआईर पर गलतबयानी पर कांग्रेस की मान्यता रद्द करने की सुप्रिम याचिका
नई दिल्ली। सम्वाददाता
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट में SIR. प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के खिलाफ एक नई जनहित याचिका दायर कर पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई गई है।याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाकर एक संवैधानिक संस्था की साख को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। याचिका में मांग की गई है कि कांग्रेस की मान्यता रद्द करने पर विचार किया जाए तथा कथित दुष्प्रचार की जांच विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए।याचिका में क्या कहा गया है?:याचिकाकर्ता का दावा है कि कांग्रेस ने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपनी निष्ठा की भावना का उल्लंघन किया है। याचिका के अनुसार चुनाव आयोग के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान आयोग के वैधानिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास है। इसमें यह भी कहा गया है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसके पुनरीक्षण का अधिकार संविधान एवं कानून के तहत केवल चुनाव आयोग को प्राप्त है।
'वोट चोरी' के आरोपों पर बढ़ा विवाद:हाल के दिनों में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, ने बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए की जा रही है।सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर:सुप्रीम कोर्ट अब बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया की वैधता और उसके क्रियान्वयन को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। अदालत यह भी देख सकती है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप संचालित हो रही है या नहीं।
राजनीतिक महत्व:बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए यह मामला अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका पर प्रश्न उठा रहा है, तो दूसरी ओर आयोग और उसके समर्थक इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके संभावित निर्देशों पर टिकी हैं।यह मामला केवल बिहार की मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का रुख आने वाले दिनों में इस बहस की दिशा तय कर सकता है।

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